खानपुर के विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन को उनकी बदजुबानी आखिरकार भारी पड़ गई। प्रदेश की राजनीति में संभवत: ऐसा पहली बार है कि किसी विधायक को तीन साल के अंतर दो-दो राष्ट्रीय दलों की प्राथमिकता सदस्यता गंवानी पड़ी है। बात साल 2014 की है जब विधानसभा सत्र की पूर्व संध्या पर तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के सरकारी आवास में सत्ता पक्ष के विधायकों के लिए आयोजित वीआईपी डिनर के दौरान फायरिंग से सनसनी फैल गई थी।
17 सितंबर की रात कृषि मंत्री हरक सिंह रावत के आवास पर आयोजित भोज में तत्कालीन वन विकास निगम के अध्यक्ष कांग्रेस विधायक प्रणव कुंवर चैंपियन ने गोली चला दी थी। इससे देहरादून के कांग्रेसी नेता विवेकानंद खंडूड़ी घायल हुए थे। चैंपियन ने पार्टी में तीन फायर किए थे। इनमें से एक गोली खंडूड़ी के पैर में लगी थी। उन्हें सीएमआई अस्पताल ले जाया गया, लेकिन पुलिस को दिए बयान में खंडूड़ी ने गोली लगने से इनकार कर दिया।
खंडूड़ी ने कहा था कि गिर जाने से उनके पैर में चोट लगी। बाद में डॉक्टरों ने भी उनके बयान की पुष्टि की। हालांकि, कुछ दिन बाद विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने बयान दिया कि गोली चैंपियन ने ही चलाई थी। इसके बाद चैंपियन पर पुलिस ने केस तो दर्ज किया, लेकिन थाने से ही जमानत दे दी गई। चैंपियन पर केस होने के बाद भी खंडूड़ी ने अपना बयान नहीं बदला। सूत्रों के मुताबिक खंडूड़ी परिचितों से अकसर कहते थे कि उन्होंने चैंपियन के खिलाफ इसलिए बयान नहीं दिया कि उनके चैंपियन के पिता से अच्छे संबंध थे।
चैंपियन अपनी हरकतों और पार्टी विधायक देशराज कर्णवाल से विवाद को लेकर पहले से ही संगठन के निशाने पर थे। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में उत्तराखंड के बारे में चैंपियन ने जो अपशब्द कहे, उसे केंद्रीय नेतृत्व पचा नहीं पाया। यही वजह थी कि पार्टी को कड़ा फैसला लेते हुए चैंपियन को हटाना पड़ा।
18 मार्च 2016 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए नौ विधायकों में कुंवर प्रणव चैंपियन भी थे। बागी होने पर कांग्रेस ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था। इसके बाद चैंपियन ने अपनी पारंपरिक सीट खानपुर से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता। वे उम्मीद कर रहे थे कि चौथी बार विधायक चुने जाने के बाद पार्टी उन्हे मंत्री बनाएगी। लेकिन उनकी हसरतें पूरी न हो सकी।