जी हां, बैंक कर्मियों द्वारा लंच टाइम बोलकर ग्राहकों के साथ अब कोई मनमानी नहीं चलेगी। आरटीआई के सवालों के जवाब में रिजर्व बैंक ने साफ-साफ जबाव दिया है कि कार्य अवधि में बैंक कभी भी अपने काउंटर या टेलर बंद नहीं कर सकते। कार्य अवधि में यदि कोई खाताधारक पहुंच गया तो उसके कार्यों का निष्पादन बैंक को करना ही होगा, चाहे उसे कैश को छोड़कर अन्य कार्यों के लिए कार्य अवधि क्यों न बढ़ानी पड़े।
RBI ने बैंक कर्मियों को सुनाया ऐसा फरमान, जिसके बाद नहीं मिलेगा लंच ब्रेक
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हल्द्वानी निवासी डा. प्रमोद अग्रवाल गोल्डी ने आरटीआई के जरिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, मुंबई से यह पूछा था कि एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा समेत अन्य बैंकों में क्या कोई लंच टाइम होता है? लंच टाइम में बैंककर्मी लेन-देन संबंधी सेवा अपने ग्राहकों दे सकता या नहीं ?
दोनों सवालों के हाल में भेजे गए जवाब में कहा गया है कि आरबीआई के डिपार्टमेंट ऑफ बिजनेस रेगूलेशन ने बैंकों में कार्य अवधि के दौरान कोई लंच टाइम यानी लंच ब्रेक की व्यवस्था नहीं दी है। इस संबंध में आरबीआई ने बैंकों ने एक जुलाई 2015 को एक सर्कुलर भी जारी किया था। उक्त सर्कुलर के पैरा संख्या 7.2, 7.3 और 7.4 में साफ लिखा है कि बैंक अपनी सुविधा के मुताबिक कार्य अवधि तय कर सकता है, लेकिन यदि वह अपने कार्यों के लिए बैंक बंद करता है तो इस बाबत उसे अपने उपभोक्ताओं को पूर्व सूचना अनिवार्य रूप से देनी होगी।
आरटीआई के खुलासे में हम उपभोक्ताओं को यह बता दें कि आरबीआई ने बैंकिंग सिस्टम के सुचारू संचालन के लिए कार्य अवधि शुरू होने से 15 मिनट पहले बैंक कर्मचारियों के पहुंचने का नियम तय किया हुआ है। आरबीआई ने बैंक मैनेजरों और अन्य अधिकारियों को निर्बाध सेवाओं के लिए यह सुनिश्चित करने के लिए कहा हुआ है कि शाखाओं में कार्य अवधि के दौरान कोई भी काउंटर या टेलर बंद न रहे।
बैंको को यह हिदायत है कि इससे संबंधित किसी ग्राहक को शिकायत का मौका न दें। आरबीआई का यह निर्देश भी कम लोग जानते हैं कि कार्य अवधि खत्म होने से पूर्व बैंक हॉल में प्रवेश कर चुके सभी ग्राहकों को अटेंड करना बैंकों के लिए जरूरी है। यहां तक कि कैश को छोड़कर चेक, रिसिप्ट समेत अन्य लंबति कार्यों के लिए यदि जरूरत पड़े तो बैंक को कार्य अवधि एक घंटा अतिरिक्त बढ़ाने का निर्देश है।