अब तक सब यही समझते थे कि उत्तराखंड में स्थित बदरीनाथ धाम का नाम भगवान विष्णु के नाम पर रखा गया है। लेकिन ऐसा नहीं है। एक देवी के त्याग के कारण बदरीनाथ धाम का नाम रखा गया है।
2 of 10
helicopter landing in badrinath dangerous for politician
एक पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान विष्णु योगध्यान मुद्रा में तपस्या में लीन थे तो बहुत अधिक हिमपात होने लगा। भगवान विष्णु हिम में पूरी तरह डूब चुके थे।
3 of 10
भगवान बदरीनाथ के दर्शन के बाद अमित शाह
- फोटो : अमरउजाला
उनकी इस दशा को देख कर माता लक्ष्मी का हृदय द्रवित हो उठा और उन्होंने स्वयं भगवान विष्णु के समीप खड़े हो कर एक बेर (बदरी) के वृक्ष का रूप ले लिया और समस्त हिम को अपने ऊपर सहने लगीं।
4 of 10
बदरीनाथ धाम में उमड़े श्रद्धालु
- फोटो : AmarUjala
माता लक्ष्मीजी भगवान विष्णु को धूप, वर्षा और हिम से बचाने की कठोर तपस्या में जुट गयीं। कई वर्षों बाद जब भगवान विष्णु ने अपना तप पूर्ण किया तो देखा कि लक्ष्मीजी हिम से ढकी पड़ी हैं।
5 of 10
बदरीनाथ धाम में कपाट खुलने के दौरान मंदिर परिसर में चौंफुला नृत्य करती पांडुकेश्वर की महिलाएं।
- फोटो : Amar Ujala
तो उन्होंने माता लक्ष्मी के तप को देख कर कहा कि तुमने भी मेरे ही बराबर तप किया है सो आज से इस धाम पर मुझे तुम्हारे ही साथ पूजा जायेगा और क्योंकि तुमने मेरी रक्षा बदरी वृक्ष के रूप में की है सो आज से मुझे बदरी के नाथ-बदरीनाथ के नाम से जाना जायेगा। इस तरह से भगवान विष्णु का नाम बदरीनाथ पड़ा।