सावधान! अगर आपने भी ऐसे इस्तेमाल किया आई ड्रॉप तो हो जाएंगे अंधे
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भारत में ग्लूकोमा के तीन लाखा के करीब मरीज रजिस्टर्ड हो चुके हैं। कई बार आंखों की सर्जरी भी ग्लूकोमा का खतरा बढ़ा देती है। सर्जरी के बाद ध्यान नहीं देने से आंखों पर प्रेशर बढ़ जाता है, जो ग्लूकोमा को निमंत्रण देती है। आंखों में कभी भी किसी प्रकार की कोई सर्जरी हुई हो या कोई घाव हो गया हो तो उसकी जांच समय-समय पर करवाते रहें। हालांकि ऐसे मरीजों की संख्या कम है, लेकिन फिर भी कोई रिस्क नहीं लेना चाहिए।
45 साल की उम्र के बाद ग्लूकोमा होने के चांस बढ़ जाते हैं। 45 के बाद आंखों का रेगुलर चेकअप कराते रहें। हो सकता है कि इस उम्र के लोगों को लगे कि उनकी नजर मोतियाबिंद की वजह से कमजोर हो रही है, लेकिन यह ग्लूकोमा भी हो सकता है।
ग्लूकोमा एक अनुवांशिक बीमारी है। ऐसे में बच्चे की आंखों की जांच करवा लीजिए। आंखों की एलर्जी, अस्थमा, चर्म रोग या किसी अन्य रोग के लिए स्टेरॉयड दवाओं का प्रयोग करने से आंखों में दिक्कत आती है तो ऐसी दवाइयों के सेवन से बचें।