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Uttarakhand Avalanche: इन शब्दों को अपमान समझते हैं पर्वतारोही सुभाष, कहा- इस खेल में जिंदा लौटना ही पुरस्कार

Fri, 07 Oct 2022 12:29 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 07 Oct 2022 12:29 PM IST
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Avalanche In Uttarkashi Uttarakhand: Draupadi Ka Danda Peak Mountaineer Subhash Taran shared his experiences
पर्वतारोही सुभाष तारण - फोटो : अमर उजाला

अकसर जब कोई पर्वतारोही किसी शिखर को छूता है तो लोग फतह, विजय और अंग्रेजी में कांक्रड जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। पर्वतों की किसी भी चोटी पर कोई कैसे विजय पा सकता है। पर्वतारोही के सम्मान में कहे जाने वाले यह शब्द दरअसल उस शिखर का अपमान हैं, जिसे वह छूकर आता है।



यह कहना है उत्तराखंड के जाने-माने पर्वतारोही सुभाष तराण का। देहरादून जिले के त्यूनी तहसील के गांव डाकखाना हटाल के रहने वाले सुभाष द्रौपदी से शिखर हादसे और पर्वतारोहण से जुड़े तमाम मुद्दों पर अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता विनोद मुसान ने बातचीत की।

पर्वतारोही सुभाष तारण कहते हैं कि पर्वतारोहण के दौरान दुर्घटना के कारणों की एक लंबी फेहरिस्त गिनाई जा सकती है, लेकिन यह भी सच है कि जोखिम पर्वतारोहण का एक अहम हिस्सा है। पर्वतारोहण के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं के इतर प्रशिक्षण के दौरान आज तक ऐसी कोई दुर्घटना नहीं हुई। देश में पर्वतारोहण प्रशिक्षण के गुलमर्ग, मनाली, उत्तरकाशी, दार्जिलिंग और डेरांग पांच ऐसे सरकारी संस्थान हैं, जहां युवाओं को पर्वतारोहण का प्रशिक्षण दिया जाता है।

Avalanche In Uttarkashi Uttarakhand: Draupadi Ka Danda Peak Mountaineer Subhash Taran shared his experiences
पर्वतारोही सुभाष तारण - फोटो : अमर उजाला

पहाड़ों पर बर्फ के स्वभाव का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल
इन संस्थानों से युवाओं को मुख्य रूप से बेसिक, एडवांस, मेथड ऑफ इंस्ट्रक्शन और सर्च एंड रेस्क्यू जैसे कोर्स करवाए जाते हैं। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान पर्वतारोहण के क्षेत्र में एशिया के सर्वश्रेष्ठ सरकारी संस्थान के तौर पर जाना जाता हैं। बकौल सुभाष, बतौर प्रशिक्षु एनआईएम को लेकर मेरा भी यही तजुर्बा है।

पर्वतारोहण के लिए जिस जरूरी कड़े प्रशिक्षण, उचित खानपान, अनुशासन, और आधुनिक तकनीकों की जरूरत होती है, उसकी गुणवत्ता के साथ यहां कोई समझौता नहीं किया जाता। द्रौपदी का डांडा-2, जहां यह दुर्घटना हुई, एनआईएम पिछले कई दशकों से एडवांस कोर्स के प्रशिक्षणार्थियों को वहां प्रशिक्षण के लिए लेकर जाता रहा है, लेकिन पहाड़ों पर बर्फ के स्वभाव का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल होता है।

Avalanche In Uttarkashi Uttarakhand: Draupadi Ka Danda Peak Mountaineer Subhash Taran shared his experiences
पर्वतारोही सुभाष तारण - फोटो : अमर उजाला

इस खेल में कोई दर्शक नहीं होता
इस बार वहां कुछ ऐसा ही हुआ होगा, जिसके चलते यह दुर्घटना हुई। सुभाष कहते हैं पर्वतारोहण व्यक्ति की शारिरिक और मानसिक इच्छाशक्ति की सीमाओं की कसौटी है। यह एक ऐसा खेल है, जहां आप अपनी जान को दांव पर लगाते हैं, और पुरस्कार में उसे वापस पाते हैं। इस खेल में कोई दर्शक नहीं होता है, पर्वतारोही को अपनी पीठ खुद ही थपथपानी पड़ती है। बावजूद इसके, पहाड़ की चोटी से जो दृश्य एक पर्वतारोही की आंखें देख सकती हैं, वह दृश्य शब्दों और तस्वीरों में उसका आधा भी नहीं समा पाता। 

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Avalanche In Uttarkashi Uttarakhand: Draupadi Ka Danda Peak Mountaineer Subhash Taran shared his experiences
पर्वतारोही सुभाष तारण - फोटो : अमर उजाला

यहां इस खेल की हर बारीकी सीखते हैं प्रशिक्षु
एक प्रशिक्षित पर्वतारोही होने की न्यूनतम अर्हता बेसिक कोर्स और उसके बाद एडवांस कोर्स है। इन कोर्सेज के दौरान पर्वतारोहण से जुड़ी आधुनिक तकनीकों, तरीकों और उपकरणों के बारे में बताया और सिखाया जाता है। एडवांस कोर्स के अंत में संस्थान के नजदीक की किसी ऐसी चोटी का आरोहण करवाया जाता है, जहां वह कोर्स के दौरान सीखी गई तकनीकों, तरीकों और तकनीकी उपकरणों का आत्मविश्वास के साथ व्यवहारिक रूप से इस्तेमाल कर पाए।

 

कोर्स करने वाले अधिकतर युवा देखते हैं एवरेस्ट आरोहण का ख्वाब 
पर्वतारोहण के प्रशिक्षण में भाग लेने वाले अधिकतर युवा एवरेस्ट आरोहण का ख्वाब देखते हैं। कुछ बिरले ऐसे भी होते हैं, जो पहाड़ों के मिजाज को समझने, उनको करीब से जानने के लिए शिखरों पर पहुंचते हैं। 

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Avalanche In Uttarkashi Uttarakhand: Draupadi Ka Danda Peak Mountaineer Subhash Taran shared his experiences
एवलांच - फोटो : अमर उजाला

आवेदन करने के दो से तीन साल बाद आता है नंबर 
पर्वतारोहण के प्रति युवाओ में दीवानगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नेहरू पर्वतारोहण संस्थान में आवेदन करने के लगभग दो से तीन साल बाद प्रशिक्षण के लिए नंबर आ पाता है। 

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