प्रत्येक वर्ष बैसाख शुक्ल सप्तमी को गंगा का जन्मोत्सव गंगा सप्तमी के रूप में पड़ता है। 22 अप्रैल यानी रविवार को गंगा जन्मोत्सव के मौके पर अगर आप ऐसा करेंगे तो शुभ लाभ मिलेगा।
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22 अप्रैल को गंगा जन्मोत्सव पर कालजयी योग, एक पत्थर मंदिर में रखने भर से मिलेगा लाभ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Sun, 22 Apr 2018 08:49 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार यह दिन गुरु के नक्षत्र पुर्नवसु में आ रहा है। यदि गुरु की दृष्टि, सूर्य और चंद्रमा दोनों पर हो तो यह योग बनता है। इस बार यह योग 12 वर्ष बाद आया है। इसलिए इस दिन का महत्व कुंभ के समान हो गया है।
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ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि कालजयी योग में स्नान का भारी महत्व है। गंगा अवतरण के समय जन्हु ऋषि इसी दिन इसी योग में गंगा का पान किया था। दधिचि ने इसी दिन और इसी योग में अपने हड्डियों का दान देवताओं को किया था। यह दिन अनेक कालजयी ऋषियों और लेखकों से जुड़ा हुआ है।
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गंगा सप्तमी के दिन गंगा से एक पत्थर निकालकर चांदी में मढ़वाकर यदि पूजाघर में रखे तो घर में सुख शांति आती है। इस दिन नारियल, ध्वजा और बताशे गंगा में चढ़ाने से सम्मान की प्राप्ति होती है। डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि गंगा में दूध चढ़ाने से सभी पापों का नाश हो जाता है। गंगा के तट पर घंटा, दीपक इत्यादि का दान देना चाहिए। गंगा की सफाई करने से विशेष फल मिलता है। चांदी की छोटी सी मछली गंगा में छोड़ी जाए तो विलक्षण पुत्री की प्राप्ति होती है। इस दिन का भारी महत्व है। गंगा स्नान के समय सात डुबकियां लगायी जानी चाहिए।
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गंगा जन्मोत्सव पर धर्मनगरी में दर्जनों तोरणद्वारों से सजाया गया है। हरकी पैड़ी पर दोपहर 12 बजे पुरोहितों द्वारा गंगा पूजन किया जाएगा। कुशावर्त सहित गंगा के सभी घाटों पर तीर्थ पुरोहित एवं व्यापारी परिवार से जमा होकर गंगा पूजन करेंगे। भव्य शोभायात्रा कुशावर्त से निकलेगी, नगर भ्रमण के बाद हरकी पैड़ी पर गंगा पूजन किया जाएगा। इसी दिन कुशावर्त पर रज्जू भैया की श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हो रहा है।