इनसे बेहद डरते थे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, खुद कबूली थी ये बात
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उत्तराखंड के टिहरी निवासी अधिवक्ता सुरेश चंद जैन ने अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की खबर सुनकर दुख से भर गए। अधिवक्ता सुरेश चंद अक्सर उनसे मिलने दिल्ली जाते थे, लेकिन अटल बिहारी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी मुलाकातें कम हो गई।
एक संस्मरण सुनाते हुए बताया कि एक बार दिल्ली अटल जी के आवास पर पर्यावरविद् सुंदरलाल बहुगुणा को उनसे मिलाया तो उन्होंने कहा था कि बहुगुणा जी से बहुत डर लगता है, वह कई दिनों तक अनशन पर बैठ जाते हैं।
पेड़ पौधों को बचाने में सुंदरलाल बहुगुणा की अहम भूमिका है। 1971 में सुन्दरलाल बहुगुणा ने पेड़ों की सुरक्षा में सोलह दिन तक अनशन किया। चिपको आन्दोलन के कारण वृक्षमित्र के नाम से वह पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गए। पर्यावरण को बचाने के लिए ही 1990 में सुंदर लाल बहुगुणा ने टिहरी बांध का विरोध किया था। वह उस बांध के खिलाफ रहे। उनका कहना था कि 100 मेगावाट से अधिक क्षमता का बांध नहीं बनना चाहिए। चिपको पदयात्रा के तहत एक बार फिर सुंदरलाल बहुगुणा ने जून 1981 में चंबा के लंगेरा गांव से हिमाचल की पदयात्रा शुरू की। 5000 किमलोमीमीटर की यह यात्रा 1983 में विश्वस्तर पर काफी तेजी से उभर कर सामने आई।
उस दौर में जनसंघ और भाजपा के प्रमुख कार्यकर्ताओं के अनुसार अटल जी तीन से अधिक बार पहाड़ के दौरे पर आए तो कर्णप्रयाग जरूर रूके। पहाड़ में शिक्षा और विकास की कमी का दर्द अटल जी को रहा। जिसके चलते अटल जी ने यहां एक स्कूल के लिए भूमि पूजन भी रखी। हालांकि आपसी विवादों के चलते स्कूल धरातल पर नहीं उतर पाया। नगर के पुजारी गांव निवासी और वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र पुजारी कहते हैं करीब वर्ष 1983-84 के आस पास अटल विहारी बाजपेयी यहां पहुंचे। इस दौरान यहां उमा देवी की पूजा भी अटल जी ने की। तब अटल जी ने मांग को स्वीकारते हुए यहां स्कूल के लिए भूमि पूजन भी किया था।