गुलदार आपके सामने आए तो क्या हालत होगी यह आप समझ सकते हैं। लेकिन उत्तराखंड की बेटी ने डर के आगे जो साहस दिखाया अब उसे पूरा देश सलाम करेगा। यह वही राखी है, जिसने नन्हें हाथों से गुलदार के खूंखार पंजों को मात देकर अपने भाई का जीवन बचा लिया। बुधवार को अपने भाई राघव के साथ अमर उजाला कार्यालय पहुंची बहादुर राखी को अपराजिता कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान राखी ने चार माह पहले घटित हुए साहसपूर्ण वाकये के बारे में भी बताया। 11 वर्षीय राखी घटना को याद कर आम आदमी की तरह सहमती नहीं हैं। बल्कि, बेबाक तरीके से बयां करती हैं। राखी ने कहा कि मैं उस दिन बिल्कुल भी नहीं डरी।
मेरी पीठ पर भाई था, जिसे बचाने को मैं उसकी ढाल बन गई। गुलदार ने मुझ पर काफी देर तक वार किए, लेकिन मैंने भाई को एक खरोंच तक नहीं आने दी। गांव वालों के शोर मचाने पर जब गुलदार भागा तो मैं बेहोश हो गई। राखी की बहादुरी की कहानी को सुनकर कार्यक्रम में आईं उसकी हमउम्र बच्चियों ने तालियां बजाकर उसका उत्साहवर्धन भी किया।
गुलदार के हमले में घायल राखी के सिर और पीठ पर कुल 45 टांके आए थे। वर्तमान में वह पूरी तरह ठीक है। कार्यक्रम के दौरान राखी की दादी विमला देवी भी मौजूद थीं। उन्होंने अपने गांव और आसपास में गुलदार की दहशत के बारे में भी बताया। इस परिचर्चा में उन्होंने ऐसे खूंखार जानवरों को मारने के संबंध में बने कानूनों की निंदा भी की।
उन्होंने बताया कि किस कदर क्षेत्र में गुलदार के नाम से ही लोग सहम जाते हैं, लेकिन उनकी पोती ने जो किया वह पहाड़ वासियों ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। ऐसे में अब सरकार को सोचना चाहिए कि वन्य जीवों और मानव के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जाएं। इस अवसर पर साक्षी नेगी, शगुन नेगी, स्वास्तिका सती, अनवी सती, गुंजन भटराई, गौरी शर्मा, अतान्या, अनवी, श्रेया शर्मा बच्चियां भी उपस्थित रहीं।