भारतीय क्रिकेट टीम के आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए शनिवार को घोषित टी20 दल में कई बड़े बदलाव देखने को मिले। श्रेयस अय्यर को नया कप्तान बनाया गया, तिलक वर्मा को उपकप्तानी सौंपी गई और 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को पहली बार राष्ट्रीय टीम में जगह मिली, लेकिन इन तमाम फैसलों के बीच जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हुई, वह था रजत पाटीदार।
रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) को लगातार दूसरी बार आईपीएल खिताब दिलाने वाले कप्तान रजत पाटीदार को भारतीय टीम में जगह नहीं मिली। उनके चयन न होने से क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों के बीच सवाल उठने लगे कि आखिर इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद चयनकर्ताओं ने उन्हें क्यों नजरअंदाज किया।
अगरकर ने क्या कहा?
मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने टीम चयन के बाद स्पष्ट किया कि कई योग्य खिलाड़ी टीम से बाहर रह गए हैं, लेकिन अंतिम रूप से सिर्फ सीमित खिलाड़ियों को ही चुना जा सकता है। अगरकर ने कहा, 'हम कई खिलाड़ियों पर चर्चा करते हैं। आप सिर्फ बैठकर 15 नाम नहीं लिख देते। भारत में बहुत अच्छे खिलाड़ी हैं। अगर आपने आईपीएल या घरेलू क्रिकेट देखा है तो ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो टीम में जगह बनाने की क्षमता रखते हैं। लेकिन जो खिलाड़ी पहले से टीम में हैं, वे भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हमने कुछ समय पहले ही विश्व कप जीता है। हमें लगता है कि हमने एक मजबूत टीम चुनी है। हमेशा कुछ खिलाड़ी बाहर रहेंगे, लेकिन हम इस टीम से बेहद खुश हैं।' अगरकर के बयान से साफ था कि पाटीदार के प्रदर्शन को नजरअंदाज नहीं किया गया, बल्कि टीम संयोजन और भविष्य की योजनाओं को प्राथमिकता दी गई।
लगातार दो बार चैंपियन बनाने वाले कप्तान
रजत पाटीदार ने पिछले दो वर्षों में आरसीबी के इतिहास को बदल दिया। 2025 में फ्रेंचाइजी को पहला आईपीएल खिताब दिलाने के बाद उन्होंने 2026 में भी टीम को चैंपियन बनाया। आमतौर पर पहली सफलता के बाद टीमों का प्रदर्शन गिर जाता है, लेकिन पाटीदार की कप्तानी में बेंगलुरु ने अपने खेल का स्तर बनाए रखा। उनकी नेतृत्व क्षमता की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने स्टार खिलाड़ियों से भरी टीम को एकजुट रखा और दबाव के क्षणों में सही फैसले लिए। यही कारण है कि लगातार दो खिताब जीतने के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह का मजबूत दावेदार माना जा रहा था।
बल्ले से भी रहे शानदार
पाटीदार सिर्फ कप्तान के तौर पर ही नहीं, बल्कि बल्लेबाज के रूप में भी आईपीएल 2026 के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे। उन्होंने पूरे सीजन में 501 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 192.69 रहा। उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वह परिस्थितियों के अनुसार अपनी भूमिका बदल सकते थे। जरूरत पड़ने पर पारी को संभालते और मौका मिलते ही आक्रामक अंदाज में रन भी बनाते थे। सीजन के दौरान उन्होंने 30 चौके और 42 छक्के लगाए। मध्यक्रम में बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने कई मौकों पर मैच का रुख बदल दिया और विपक्षी गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा।
बीच के ओवरों में खतरनाक
अगर पाटीदार के आंकड़ों को विस्तार से देखा जाए तो उनका प्रभाव और भी बड़ा नजर आता है। पावरप्ले में उन्होंने अपेक्षाकृत धीमी शुरुआत की, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ा, उनका आक्रमण और तेज होता गया। सातवें से 11वें ओवर के बीच उन्होंने 190 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए। वहीं 12वें से 16वें ओवर के बीच उनका स्ट्राइक रेट 216.67 रहा। डेथ ओवरों में भी उन्होंने 278.57 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। यानी वह उन दुर्लभ बल्लेबाजों में शामिल रहे जो पारी को आगे बढ़ाने और तेजी से खत्म करने, दोनों भूमिकाएं निभा सकते हैं।