विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल की 8 साल बाद भारतीय क्रिकेट टीम भारतीय में वापसी हुई। अगस्त 2008 में अपने आखिरी टेस्ट खेलने वाले पार्थिव गांगुली, द्रविड़ और कुंबले के बाद अब कोहली की कप्तानी में खेलेंगे। पटेल ने 2002 में 17 साल की उम्र में डेब्यू किया और 20 टेस्ट के अपने करियर में 4 हाफ सेंचुरी की बदौलत 683 रन बनाए हैं। इसके अलावा उन्होंने 41 कैच लपके हैं और 8 स्टंपिंग्स भी की हैं।
पार्थिव पटेल ही क्यों, ये खिलाड़ी भी बन सकते थे साहा का विकल्प
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पार्थिव पटेल
- फोटो : sporting Heroes
मौजूदा रणजी सीजन में पार्थिव ने 5 मैचों में 59.28 की औसत से 415 रन बनाए हैं, जिसमें 1 सेंचुरी और 3 हाफ सेंचुरी शामिल हैं। पार्थिव की खासियत यही हैं कि वो किसी भी नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं। हालांकि सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्थिव को साहा के विकल्प के रूप में खिलाना सही होगा। चयनकर्ताओं का फैसला अपनी जगह है, मगर कुछ ऐसे भी खिलाड़ी हैं, जिनका पलड़ा प्रदर्शन और अनुभव के आधार पर पार्थिव से भारी नजर आता है:
पार्थिव पटेल ही क्यों, ये खिलाड़ी भी बन सकते थे साहा का विकल्प
नमन ओझा
2015 में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करने वाले नमन ओझा मौजूदा रणजी सीजन में मध्यप्रदेश के लिए पहले 4 मैच नहीं खेल पाए। हालांकि ओझा एक काबिल कीपर हैं, जो क्रीज पर लंबा समय बिता सकते हैं। हालांकि रणजी सत्र से दूर रहना उनके खिलाफ जाता है। इसके अलावा नमन की उम्र भी पार्थिव से ज्यादा है।
पार्थिव पटेल ही क्यों, ये खिलाड़ी भी बन सकते थे साहा का विकल्प
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दिनेश कार्तिक
- फोटो : IPL
दिनेश कार्तिक
टीम इंडिया के लिए दिनेश कार्तिक भी एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते थे। कार्तिक ने 23 टेस्ट मैचों में 1000 रन बनाए हैं, जिसमें 1 शतक और 7 अर्धशतक शामिल हैं। कार्तिक ने घरेलु क्रिकेट में शानदार खेल दिखा कर अपने लोहा मनवाया है। हालांकि कार्तिक और विजय के बीच निजी कारणों के चलते कार्तिक को दरकिनार करना जायज दिखाई पड़ता है क्योंकि विजय टेस्ट टीम के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हैं।
पार्थिव पटेल ही क्यों, ये खिलाड़ी भी बन सकते थे साहा का विकल्प
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रॉबिन उथप्पा
- फोटो : BCCI
रॉबिन उथप्पा
लंबे समय से टीम से बाहर चल रहे उथप्पा ने सीमित ओवरों के मैचों में अपनी प्रतिभा साबित की है। विकल्प के तौर पर उन्हें टेस्ट में डेब्यू करने का मौका दिया जा सकता था। घरेलु स्तर पर भी उथप्पा ने हर साल जमकर रन बनाए हैं। जिंबाब्वे सीरीज के दौरान ठीक-ठाक प्रदर्शन करने वाले उथ्पपा को टीम में शामिल करके एक मौका दिया सकता था।