हम दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल से महज एक दिन दूर हैं और 1996 के बाद पहली बार विश्व क्रिकेट के एक नए विश्व कप विजेता को देखेंगे। मेजबान इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की टीम ने खिताबी मुकाबले के लिए अपनी कमर कस ली है। दोनों के पास मौका है, पहली बार विश्व कप के खिताब को अपने नाम करने का।
ये पांच खिलाड़ी जिन्हें और मौके मिले होते, तो विश्व कप में उनकी तूती बोलती
पाकिस्तान के लिए यह टूर्नामेंट पहले हाफ में निराशाजनक रहा। दूसरे हाफ में पाकिस्तान की टीम ने वापसी जरूर की पर तब तक काफी देर हो चुकी थी। पाकिस्तान नेट रन रेट में न्यूजीलैंड से पिछड़ गया और सेमीफाइनल में जगह नहीं बना पाया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान पाक टीम बाबर आजम और इमाम-उल-हक या मोहम्मद हफीज के इर्द गिर्द घुमती रही पर उसका मध्यक्रम कमजोर ही रहा।
पाक टीम के पास एक बेहतरीन बल्लेबाज था, जिसे बाद में मौका मिला तो उसने रन बनाए। हारिस सोहेल को वेस्टइंडीज के खिलाफ फेल होने के बाद कुछ मैचों के लिए बैठा दिया गया। वेस्टइंडीज के खिलाफ सोहेल ने सिर्फ 8 रन बनाए थे। टूर्नामेंट के अंत में सोहेल ने 94.28 की बेहतरीन स्ट्राइक रेट के साथ 39.60 की औसत से 5 पारियों में 189 रन बनाए। यदि उन्हें पहले ही पाक टीम ने अपने अंतिम 11 में जगह दी होती, तो उसका मध्यक्रम मजबूत रहता।
इस विश्व कप में वेस्टइंडीज ने कैसा प्रदर्शन किया, यह कई लोगों को याद नहीं है क्योंकि कैरेबियाई सेना ने कुछ खास खेल नहीं दिखाया, लेकिन शेल्डन कॉटरेल ने शानदार गेंदबाजी का प्रदर्शन किया। हालांकि वेस्टइंडीज ने अपने अनुभवी खिलाड़ी को कम मौके दिए।
केमार रोच के अनुभव को टीम को पहले ही इस्तेमाल करना चाहिए था। रोच ने इस विश्व कप में 3 मैच खेले, इसमें उन्होंने 18.5 की औसत और 3.70 की शानदार इकॉनामी के साथ 6 विकेट चटकाए।
श्रीलंका के लिए यह विश्व कप निराशाजनक रहा, वो 9 मैचों में से केवल तीन जीत सके। कुशल परेरा के अलावा कोई भी बल्लेबाज रंग में नजर नहीं आया। कुसल मेंडिस और एंजेलो मैथ्यूज जैसे खिलाड़ी ज्यादातर असफल रहे।
इंग्लैंड के खिलाफ मिली जीत में थिरिमाने की जगह युवा अविष्का फर्नांडो को नंबर तीन पर बल्लेबाजी करने के लिए लाया गया। युवा फर्नांडो ने 32 गेंद में 49 रन बनाकर पारी को मजबूती दी। उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ शतक बनाया। कुल मिलाकर, दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने 50.75 की औसत से 4 पारियों 105.72 के शानदार स्ट्राइक रेट से 204 रन बनाए। अगर उन्हें ज्यादा मौके दिए जाते तो श्रीलंका को सेमीफाइनल में जगह बनाने में शायद कामयाब मिल जाती।
टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा को इस विश्व कप में सिर्फ दो मैच खेलने का मौका मिला। जडेजा ने दो ही मैच में दिखा दिया कि टीम इंडिया का मैनेजमेंट उन्हें बेंच पर बैठाकर कितनी बड़ी गलती कर रहा था। जडेजा ने सेमीफाइनल में जो न्यूजीलैंड के खिलाफ पारी खेली वो दर्शनीय पारी थी। जडेजा ने दो मैच खेले और 77 रन बनाए। सेमीफाइनल में जडेजा ने 10 ओवर में 34 रन देकर एक विकेट भी चटकाए। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के दौरान सब्सटियूट फील्डिंग करते हुए 44 रन भी बचाए।
जिस तरह का प्रदर्शन जडेजा ने किया, अगर उन्हें और पहले खेलने का मिला होता, तो वह भी अपने प्रदर्शन से छाप छोड़ने में सफल रहते।