तारीख 24 अप्रैल 1973, जगह मुंबई का निर्मल हॉस्पिटल। आज से ठीक 45 सालों पहलें उस शख्स का जन्म हुआ, जिसे आज पूरा हिंदुस्तान 'क्रिकेट के भगवान' के नाम से जानता है। एक के बाद एक विश्व क्रिकेट के लगभग सभी कीर्तिमान अपने नाम करने वाले मास्टर-ब्लास्टर की जिंदगी किसी सीख से कम नहीं। जीवन के हर मोड़ पर दिलचस्प किस्से समेटने वाले सचिन से जुड़ा एक यादगार लम्हा आज आपसे शेयर करते हैं। बात है 24 फरवरी 2010 की। जी हां, वही दिन जब सचिन ने वनडे इंटरनेशनल इतिहास की पहली सेंचुरी अपने नाम की थी।
भारत रत्न और गॉड ऑफ क्रिकेट मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट के भगवान का तमगा ग्वालियर के कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम में खेले गए मैच से ही मिला था। यहां सचिन ने 24 फरवरी 2010 को अंतर्राष्ट्रीय वन-डे मैच में पहला दोहरा शतक जमाया था, उनसे पहले कोई और बल्लेबाज ये कारनामा नहीं दिखा सका था।
साउथ अफ्रीकी गेंदबाजों की जमकर खबर लेते हुए सचिन ने इस पारी में पूरे 50 ओवर बल्लेबाजी की और अंत तक नॉटआउट रहे। सचिन ने करियर के इस यादगार पल के बारे में अपनी आत्मकथा में 'प्लेइंग इट माय वे' में भी बताया था। बकौल इस पारी के बाद उन्हें नींद ही नहीं आई। उन्होंने कहा कि उस शाम वो इतने खुश और उत्साहित थे कि वो सो ही नहीं पा रहे थे।
सचिन ने उस रात के बारे में अपनी किताब में विस्तार से ब्यौरा दिया। सचिन मैच के दौरान काफी थक गए थे। होटल में उनका और धोनी का कमरा बाकी साथी खिलाड़ियों से अलग और दूर था। उनका कमरा बहुत बड़ा था, जिसमें प्राइवेट पूल भी शामिल था। बाथरूम बहुत विशाल था, जिसका दरवाजा शीशे का था। बाहर नजर गई तो बड़े-बड़े पेड़ नजर आ रहे थे और कमरे के पर्दे हवा से लहरा रहे थे।
सचिन के बताया कि ऐसे नजारे में सो पाना मुश्किल हो रहा था। सचिन को पूरी रात बाथरूम की बत्तियां जलाए रखनी पड़ी। इसके बाद उन्होंने फोन उठाया और बधाई संदेशों को जवाब देने लग गए। सचिन से पहले वनडे में सर्वाधिक स्कोर 194 रन का था, जो पाकिस्तान के सईद अनवर के नाम था। अनवर ने 1997 में भारत के खिलाफ यह पारी खेली थी। बाद में 2009 के दौरान जिम्बॉब्वे के चार्ल्स कॉवेन्ट्री ने बांग्लादेश के खिलाफ भी इतने ही रन बनाए थे।