भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच पांच मैचों की टी-20 सीरीज खेली जा रही है। दक्षिण अफ्रीकी टीम ने भारत पर 2-1 की बढ़त बनाई हुई है। टीम इंडिया की कप्तानी ऋषभ पंत कर रहे हैं। हालांकि, उनकी कप्तानी इतनी अच्छी नहीं रही है और भारत पर सीरीज गंवाने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में पंत के ऊपर दबाव होगा कि वह शुक्रवार को वह टीम इंडिया को सीरीज में वापस लेकर आएं।
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धोनी और पंत
- फोटो : सोशल मीडिया
पंत पहली बार अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी संभाल रहे हैं। इससे पहले उन्होंने आईपीएल में दिल्ली फ्रेंचाइजी के लिए कप्तानी की है। हालांकि, आईपीएल में भी वह अपनी टीम को चैंपियन नहीं बना सके हैं। 2021 में पंत की दिल्ली टीम प्लेऑफ से बाहर हुई थी। वहीं, 2022 में दिल्ली लीग स्टेज से ही बाहर हो गई। ऐसे में बतौर कप्तान पंत की दावेदारी उतनी मजबूत नहीं दिख रही है।
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पंत और धोनी
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टी-20 में डिसीजन रिव्यू सिस्टम (डीआरएस) का भी रोल अहम माना जाता है। डीआरएस से मतलब है कि अंपायर के किसी फैसले को चुनौती देना। इस स्थिति में तीसरे अंपायर के पास मामला पहुंचता है और वह पूरे प्रूफ के साथ फैसला सुनाता है। अंपायर के फैसले को चुनौती देने का अधिकार सिर्फ टीम के कप्तान के पास होता है। डीआरएस की शुरुआत 2009 में हुई थी। 2011 में इसे वनडे में शामिल किया गया था।
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धोनी रिव्यू सिस्टम
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तब भारत के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी थे। धोनी जब तक टीम इंडिया के कप्तान रहे, डीआरएस को धोनी रिव्यू सिस्टम के नाम से भी जाना गया। ऐसा इसलिए क्योंकि धोनी ने जब भी रिव्यू लिया या अंपायर के फैसले को चुनौती दिया, तब वे सफल साबित हुए। यानी अंपायर को अपने फैसले को बदलना पड़ा।
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धोनी और पंत
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धोनी के डीआरएस में कामयाब होने की सबसे बड़ी वजह उनका अनुभव था। इसके साथ ही वह एक विकेटकीपर थे, जिससे गेंदबाजों को रिव्यू लेने में मदद मिलती थी। धोनी की कप्तानी में भारत ने फील्डिंग के वक्त लगभग 50 प्रतिशत रिव्यू में जीत हासिल की यानी अंपायर को अपना फैसला बदलना पड़ा। आईपीएल में भी धोनी का रिकॉर्ड शानदार रहा है।