यह ऐसा विश्व कप है जिस पर दावेदारी ठोकने के लिए ज्यादातर टीमों ने अपने तरकश में कलाई के स्पिनरों और खब्बू तेज गेंदबाजों को शामिल किया है।
सुरेश रैना ने बताई टीम इंडिया की कमजोरी, ऋषभ पंत और धोनी को लेकर भी कह दी बड़ी बात
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धोनी को छोड़ अनुभवहीन मध्य क्रम
रैना मानते हैं इस बार विश्व कप का फारमेट काफी अलग है। नौ मैच खेलने हैं। भारतीय टीम का उच्च क्रम अच्छा है। मध्य क्रम में लंबे समय से कोई ठोस बल्लेबाज नहीं है जो धोनी का साथ दे सके। पहले वह और युवराज यह भूमिका निभाते थे।
यह जरूरी हो जाता है कि रोहित, शिखर और विराट 30 से 35 ओवर तक बल्लेबाजी करें। जिससे मध्य क्रम का काम आसान हो जाए। विराट के अलावा रोहित, शिखर भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
अगर ये तीनों अच्छा करते हैं तो मध्य क्रम में धोनी का काम आसान हो जाएगा। अगर धोनी को 20 ओवरों में बल्लेबाजी के लिए आना पड़ा तो मुश्किल होगी। जैसा पहले अभ्यास मैच में देखने को मिला। धोनी को छोड़ उच्च क्रम के मुकाबले मध्य क्रम को उतना अनुभव नहीं है। फिर हार्दिक पांड्या को भी स्विंग में खेलने में दिक्कत आती है।
राहुल खेलें नंबर चार पर
राहुल को अनुभव के हिसाब से नंबर चार पर खेलना चाहिए। फिर दिनेश कार्तिक की जगह चयन समिति को ऋषभ पंत को अवसर देना चाहिए था। जिस तरह से उन्होंने इंग्लैंड, आस्ट्रेलिया में टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाजी की थी।
मुझे लगता है कि चयन समिति से थोड़ी चूक हुई है जो उन्होंने मध्य क्रम में एक बांए हाथ के बल्लेबाज को नहीं रखा है। सारी टीमों के पास लेग स्पिनर हैं। हमारे पास शिखर के अलावा कोई बांए हाथ का बल्लेबाज नहीं है। राहुल को विराट पिछले एक दो सालों से काफी हौसला देते रहे हैं जिससे लगता है राहुल नंबर चार पर बल्लेबाजी करेंगे।
मध्य क्रम में महत्वपूर्ण है खब्बू बल्लेबाज
मध्य क्रम में एक बांए हाथ का बल्लेबाज होना महत्वपूर्ण होता है। 2011 विश्व कप में वह और युवराज खेले थे।
2015 में पाकिस्तान के खिलाफ विराट कोहली धीमा खेल रहे थे। उनके पास यासिर शाह, शाहिद आफरीदी के अलावा खब्बू गेंदबाज वहाब रियाज थे। तब धोनी ने उन्हें उतारा था। जहां उन्होंने ताबड़तोड़ 56 गेंदों में 74 रन बनाए। थे।
मध्य क्रम में दांए और बांए हाथ का कांबिनेशन महत्वपूर्ण हो जाता है। बांए हाथ का बल्लेबाज होने से लेग स्पिनर का आसानी से सामना किया जा सकता है।
ऋषभ ने इंग्लैंड और आस्ट्रेलिया में शतक बनाए हैं। उनके पिछले दो आईपीएल अच्छे गए हैं। अगर वह होते तो कप्तान के पास अच्छा विकल्प होता।
बांए हाथ के गेंदबाज होंगे चुनौती
रैना के मुताबिक भारतीय टीम के लिए बांए हाथ के तेज गेंदबाजों को खेलना बड़ी चुनौती होगी।
पिछले कुछ समय से भारतीय बल्लेबाज बांए हाथ के तेज गेंदबाजों को अच्छी तरह नहीं खेल रहे हैं। पाकिस्तान के पास मुहम्मद आमिर और वहाब रियाज हैं। बोल्ट भी काफी अच्छे हैं। भारत के खिलाफ अभ्यास मैच में उन्होंने विकेट भी निकाले। फिर विराट और रोहित ऐसे गेंदबाजों के आगे मुश्किल में रहते हैं।
चैंपियंस ट्राफी के फाइनल में भी आमिर ने विराट को मुश्किल में डालकर जाल में फंसाया था। मौसम भारी रहा तो भारतीय टीम के लिए बल्लेबाजी चुनौतीपूर्ण होगी। यह अभ्यास मैच में दिखाई पड़ा है। यही कारण है कि टीम को पूरे जिगर और विश्वास के साथ खेलना पड़ेगा। यही कारण है कि उन्हें लगता है कि इस बार गेंदबाजी बल्लेबाजी के मुकाबले ज्यादा मजबूत है।
मुझे लगता है कि विराट टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करना पसंद करेंगे। उन्हें नहीं लगता है कि इंग्लिश परिस्थितियों में लक्ष्य का पीछा करना आसान होगा।