क्रिकेट में मैच फिक्सिंग की जांच और इस बुराई से निपटने के लिए कानूनी मसौदा तैयार करने में भारत मदद करेगा। श्रीलंका टीम के पूर्व कप्तान और अब पेट्रोलियम मंत्री अर्जुन रणतुंगा ने यह जानकारी दी है। रणतुंगा ने कहा कि भारत का केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) श्रीलंका क्रिकेट में बड़े पैमाने पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता मुहैया करा सकता है। रणतुंगा ने नई दिल्ली से श्रीलंका लौटने के बाद कहा, 'हमारे पास इस समस्या से पूरी तरह से निपटने की विशेषज्ञता या कानून नहीं है।
भारत इससे जुड़ा कानूनी मसौदा बनाने में भी मदद करेगा।' सीबीआई ने 2000 में रणतुंगा और टीम के उपकप्तान अरविंद डि सिल्वा पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगाया था, लेकिन बाद में दोनों को आरोप मुक्त कर दिया गया था। श्रीलंका ने क्रिकेट में जुड़े भ्रष्टाचार के मामले उजागर होने के बाद वादा किया था कि मैच फिक्सिंग के आरोपों की जांच के लिए विशेष पुलिस इकाई का गठन किया जाएगा। मैच फिक्सिंग के ये आरोप मई में जारी डाक्यूमेंट्री में लगाए गए थे। हाल के दिनों में देश के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी सनत जयसूर्या पर आईसीसी ने मैच फिक्सिंग से जुड़ी जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया था।
इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ने फिक्सिंग के आरोपों को नकारा
हाल ही में एक निजी चैनल अल जजीरा ने स्पॉट फिक्सिंग को लेकर अपने स्टिंग ऑपरेशन की दूसरी किश्त को प्रसारित किया है जिससे क्रिकेट जगत में खलबली है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसमें दावा किया गया कि 2011-12 के बीच 15 मैचों में स्पॉट फिक्सिंग की गई थी।
इसमें एक कथित मैच फिक्सर के हवाले से इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के कुछ खिलाड़ियों पर उंगली उठाई गई। जबकि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेट बोर्डों ने इन दावों की प्रतिक्रिया में कहा है कि इसमें किसी खिलाड़ी की भ्रष्ट गतिविधियों के प्रमाणिक साक्ष्य नहीं है।
ईसीबी ने कहा कि जो सूचनाएं हैं उनसे किसी तरह के नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता। हम क्रिकेट की गरिमा को बचाए रखने के लिए गंभीर हैं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि फिक्सिंग को लेकर जीरो टोलरेंस (शून्य सहिष्णुता) नीति है। हमें भ्रष्टाचार का कोई मामला नहीं मिला।