क्रिकेट जगत के महानतम कप्तानों और ऑलराउंडरों में से एक भारत के दिग्गज कपिल देव आज अपना 62वां जन्मदिन मना रहे हैं। भारत को अपनी कप्तानी में पहला विश्व कप का खिताब दिलाने वाले पूर्व कप्तान कपिल देव क्रिकेट के हर क्षेत्र में अव्वल रहे। उन्होंने बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी तक और फील्डिंग से लेकर टीम की कमान संभालने तक, हमेशा अपना सौ प्रतिशत दिया। यही कारण है कि दुनियाभर के क्रिकेटरों में उनका विशेष स्थान है।
6 जनवरी 1959 में चंडीगढ़ जन्में कपिल देव रामलाल निखंज ने अपने 16 साल के क्रिकेट करियर में कई कीर्तिमान बनाए और रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराया। वह टेस्ट क्रिकेट इतिहास में एकलौते ऐसे खिलाड़ी रहे जिसने 5000 रन बनाए और 400 से अधिक विकेट चटकाए। क्रिकेट के मैदान में बल्ले और गेंद से विरोधियों को पस्त करने वाले कपिल सामाजिक जीवन में बेहद शांत स्वभाव के रहे। वैसे तो उनसे जुड़ी कई यादें और किस्से हैं जो उनके प्रशंसकों के दिलों में हैं लेकिन एक वाकया ऐसा भी है जिससे उनकी प्रसिद्धि और दीवानगी का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कपिल देव ने 1978-1994 की अवधि में 131 टेस्ट मैच खेले, इस दौरान उन्होंने 5248 रन और 434 विकेट हासिल किए। अगर उन्हें 1984-85 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच से बाहर नहीं किया गया होता तो उनका टेस्ट करियर लगातार 132 टेस्ट मैचों का होता। कपिल देव ने भारत की तरफ से लगातार 66 टेस्ट खेले और इसके बाद उन्हें टीम से निकाल दिया गया। लेकिन एक टेस्ट के बाद ही उनकी टीम में वापसी हुई और उन्होंने फिर लगातार 65 टेस्ट खेले।
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कपिल देव
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दरअसल 1984/85 में इंग्लैंड की टीम भारत दौरे पर 5 टेस्ट मैचों की सीरीज खेल रही थी। तब बंबई में खेला गया पहला टेस्ट भारत ने जीता था। लेकिन इसके बाद भारत को दिल्ली टेस्ट में हार का सामना करना पड़ा। इस मैच में भारत की हार के लिए में कपिल देव की गैरजिम्मेदाराना बल्लेबाजी को जिम्मेवार ठहराया गया। कपिल ने तब दूसरी पारी में आक्रामक बल्लेबाजी करने के सोचा और 6 गेंदों में 7 रन बनाए लेकिन फिर 4 मिनट क्रीज पर बिताने के बाद छक्का मारने के चक्कर में कैच आउट होकर पवेलियन लौट गए।
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कपिल देव
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भारत की इस हार के बाद कपिल देव को अगले टेस्ट के लिए टीम में शामिल नहीं किया गया। कोलकाता टेस्ट में टीम इंडिया बिना कपिल देव के उतरी। यह देखकर ईडन गार्डन्स में मैच देखने आए उनके प्रशंसक काफी नाराज हुए। दर्शकों ने मैच के दौरान ही कप्तान गावस्कर के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी- 'वी वांट कपिल, गावस्कर गो बैक।' स्टेडियम की दीवारों पर यह तक लिख दिया गया, 'नो कपिल नो टेस्ट।'