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IPL 2026: सैमसन-जडेजा की अदला-बदली की खबरों ने हिला डाला? जानिए क्या हैं ट्रेड के नियम, यह किस तरह काम करता है
Thu, 13 Nov 2025 08:26 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 13 Nov 2025 08:26 AM IST
सार
इस बार आईपीएल में सिर्फ पैसों की नहीं, दिमाग और रणनीति की भी असली बाजी चल रही है। अगले साल मेगा ऑक्शन होना है और उससे पहले टीम अपना कोर तैयार करना चाहती है, ताकि उसे अगले ऑक्शन में बरकरार रखा जा सका। और यही चीज इस लीग को दुनिया की सबसे रोमांचक क्रिकेट लीग बनाती है।
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आईपीएल ट्रेड का नियम कैसे काम करता है
- फोटो : ANI
आईपीएल 2026 मिनी ऑक्शन नजदीक है और इसी के साथ शुरू हो गई है 'ट्रेड विंडो' की हलचल। इस बार सुर्खियों में हैं राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन और चेन्नई सुपर किंग्स के रवींद्र जडेजा, जिनके संभावित ट्रेड की खबरों ने क्रिकेट जगत को हिला दिया है। आईपीएल नीलामी अक्सर चर्चा में रहती है, लेकिन इस बार सबसे बड़ा सवाल यह है कि आईपीएल में ट्रेड प्रक्रिया कैसे होती है? खिलाड़ी बदलने के नियम क्या हैं और किन शर्तों पर यह सौदे तय होते हैं? आइए जानते हैं...
संजू सैमसन का ट्रेड चर्चा में
- फोटो : ANI
क्या होता है आईपीएल में प्लेयर ट्रेड?
ट्रेड यानी किसी खिलाड़ी का बिना दोबारा नीलामी में जाए एक टीम से दूसरी टीम में जाना। यह दो तरीकों से होता है-
ट्रेड यानी किसी खिलाड़ी का बिना दोबारा नीलामी में जाए एक टीम से दूसरी टीम में जाना। यह दो तरीकों से होता है-
- खिलाड़ियों की अदला-बदली और इसे प्लेयर स्वैप भी कहते हैं।
- पैसे के बदले खरीद-फरोख्त और इसे कैश डील भी कहते हैं।
पथिराना और करन
- फोटो : BCCI
उदाहरण के लिए, अगर चेन्नई सुपर किंग्स किसी खिलाड़ी को राजस्थान रॉयल्स को देती है और बदले में कोई दूसरा खिलाड़ी या रकम लेती है, तो यह ट्रेड कहलाता है। इस प्रक्रिया में खिलाड़ी को नीलामी टेबल पर वापस नहीं आना पड़ता।
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रोहित शर्मा और ट्रेविस हेड
- फोटो : ANI
ट्रेड विंडो कब खुलती है?
आमतौर पर हर सीजन खत्म होने के लगभग एक महीने बाद ट्रेड विंडो खुलती है। यह अगले ऑक्शन से एक हफ्ते पहले तक चालू रहती है। नीलामी के बाद यह फिर से खुलती है और टूर्नामेंट शुरू होने से करीब एक महीने पहले तक सक्रिय रहती है। यानी टीमों के पास काफी समय होता है अपनी रणनीति के हिसाब से खिलाड़ियों की अदला-बदली करने का।
आमतौर पर हर सीजन खत्म होने के लगभग एक महीने बाद ट्रेड विंडो खुलती है। यह अगले ऑक्शन से एक हफ्ते पहले तक चालू रहती है। नीलामी के बाद यह फिर से खुलती है और टूर्नामेंट शुरू होने से करीब एक महीने पहले तक सक्रिय रहती है। यानी टीमों के पास काफी समय होता है अपनी रणनीति के हिसाब से खिलाड़ियों की अदला-बदली करने का।
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हार्दिक पांड्या
- फोटो : IPL/BCCI
कैसे तय होता है सौदे का मूल्य?
एकतरफा ट्रेड, जिसे वन-वे ट्रेड भी कहते हैं, उसमें खिलाड़ी खरीदने वाली टीम वही रकम चुकाती है, जिस पर वह पिछली बार नीलाम हुआ था। अगर यह अदला-बदली (स्वैप) वाला सौदा है, तो दोनों टीमें खिलाड़ियों की कीमत का अंतर मिलाकर सौदा तय करती हैं।
उदाहरण के लिए,
एकतरफा ट्रेड, जिसे वन-वे ट्रेड भी कहते हैं, उसमें खिलाड़ी खरीदने वाली टीम वही रकम चुकाती है, जिस पर वह पिछली बार नीलाम हुआ था। अगर यह अदला-बदली (स्वैप) वाला सौदा है, तो दोनों टीमें खिलाड़ियों की कीमत का अंतर मिलाकर सौदा तय करती हैं।
उदाहरण के लिए,
- जब हार्दिक पांड्या ने 2024 में गुजरात टाइटंस छोड़कर मुंबई इंडियंस में वापसी की, तो मुंबई ने गुजरात को उनका मूल ऑक्शन मूल्य और अतिरिक्त ट्रांसफर फीस दी थी।
- इसी तरह, लखनऊ सुपर जायंट्स और राजस्थान रॉयल्स ने आवेश खान और देवदत्त पडिक्कल का टू-वे ट्रेड किया था, जिसमें लखनऊ ने 2.25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी दी थी।
- इसी तरह 2021 में जब सीएसके ने रॉबिन उथप्पा को राजस्थान से ट्रेड किया था, तो वह ऑल कैश डील था। यानी सीएसके ने राजस्थान को बदले में कोई खिलाड़ी देने की बजाय राशि दी थी।