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Controversy: 'क्यों पक्षपात और भ्रष्टाचार वाले समय में वापस जा रहा ICC?' कन्कशन विवाद पर रेफरी ब्रॉड का बयान
Mon, 03 Feb 2025 09:48 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 03 Feb 2025 09:48 AM IST
सार
ब्रॉड ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आईसीसी तटस्थ मैच अधिकारियों को जिम्मेदारी संभालने की अनुमति देकर पक्षपात और भ्रष्टाचार के पुराने बुरे दिनों में लौट रहा है।
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कन्कशन विवाद
- फोटो : Twitter
भारत और इंग्लैंड के बीच चौथे टी20 में शिवम दुबे से हर्षित राणा को कन्कशन रिप्लेसमेंट किए जाने को लेकर हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस पर दिग्गज मैच रेफरी और पूर्व क्रिकेटर क्रिस ब्रॉड का बयान आया है। उन्होंने आईसीसी पर तो हमला बोला ही है, साथ ही चौथे टी20 में मैच रेफरी रहे जवागल श्रीनाथ (नाम लिए बिना) पर भी निशाना साधा है। ब्रॉड ने आईसीसी पर निशाना साधते हुए कहा कि क्यों आईसीसी पुराने दिनों में वापस जा रहा है जब मैच अधिकारी किसी एक टीम का पक्ष लेते थे और भ्रष्टाचार होता था।
दरअसल, चौथे टी20 में भारतीय पारी के दौरान 20वें ओवर में शिवम दुबे को सिर में गेंद लगी थी, लेकिन जांच के बाद उन्हें खेलने के लिए क्लीयरेंस मिल गई थी। हालांकि, फिर वह आउट हो गए थे, लेकिन जब टीम इंडिया फील्डिंग के लिए आई तो हर्षित राणा मैदान पर आए। ऐसे में इंग्लैंड के कप्तान जोस बटलर भी हैरान थे और उन्होंने बाद में बताया भी कि उन्हें नहीं पता था हर्षित क्यों आए हैं और न ही कन्कशन को लेकर भारतीय टीम ने उनसे चर्चा की थी। दुबे ने जहां 53 रन बनाए थे, वहीं हर्षित ने गेम पलट दिया। उन्होंने तीन विकेट लेकर इंग्लैंड के मध्यक्रम को ध्वस्त कर दिया था। अब आईसीसी मैच रेफरी क्रिस ब्रॉड ने इस मामले पर कुछ आक्रामक टिप्पणी की है।
ब्रॉड ने किया पोस्ट
ब्रॉड ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आईसीसी तटस्थ मैच अधिकारियों को जिम्मेदारी संभालने की अनुमति देकर पक्षपात और भ्रष्टाचार के पुराने बुरे दिनों में लौट रहा है। ब्रॉड ने लिखा, 'इस तरह की स्थिति को रोकने के लिए स्वतंत्र मैच अधिकारियों को लाया गया था। आईसीसी पक्षपात और भ्रष्टाचार के 'बुरे पुराने दिनों' में क्यों लौट रहा है?' इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन की टिप्पणी पर भी ब्रॉड ने प्रतिक्रिया दी। पीटरसन ने कहा था कि हर्षित राणा शिवम दुबे के लाइक टू लाइक रिप्लेसमेंट नहीं थे। ब्रॉड ने कहा कि वह इससे पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने पीटरसन की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'बिल्कुल सहमत हूं। कोई भारतीय मैच रेफरी इस भारतीय विकल्प को अनुमति देने से कैसे बच सकता है? मैच अधिकारियों को पक्षपात रोकने के लिए काम करना चाहिए!'
ब्रॉड ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि आईसीसी तटस्थ मैच अधिकारियों को जिम्मेदारी संभालने की अनुमति देकर पक्षपात और भ्रष्टाचार के पुराने बुरे दिनों में लौट रहा है। ब्रॉड ने लिखा, 'इस तरह की स्थिति को रोकने के लिए स्वतंत्र मैच अधिकारियों को लाया गया था। आईसीसी पक्षपात और भ्रष्टाचार के 'बुरे पुराने दिनों' में क्यों लौट रहा है?' इंग्लैंड के पूर्व कप्तान केविन पीटरसन की टिप्पणी पर भी ब्रॉड ने प्रतिक्रिया दी। पीटरसन ने कहा था कि हर्षित राणा शिवम दुबे के लाइक टू लाइक रिप्लेसमेंट नहीं थे। ब्रॉड ने कहा कि वह इससे पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने पीटरसन की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'बिल्कुल सहमत हूं। कोई भारतीय मैच रेफरी इस भारतीय विकल्प को अनुमति देने से कैसे बच सकता है? मैच अधिकारियों को पक्षपात रोकने के लिए काम करना चाहिए!'
Absolutely agree. How can an Indian Match Referee get away with allowing this Indian replacement? Match officials should be independent to omit bias!
— Chris Broad (@ChrisBroad3) February 1, 2025
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ब्रॉड इसका जवाब नहीं दे पाए
क्रिस ब्रॉड से यह पूछे जाने पर कि पिछले साल मई में ओवल में इंग्लैंड बनाम पाकिस्तान मैच में वह खुद रेफरी क्यों थे? ब्रॉड ने कुछ भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। ब्रॉड खेल में सबसे सम्मानित आईसीसी अधिकारियों में से एक हैं। वह अब तक अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर 622 मैचों में रेफरी रह चुके हैं। इस सूची में वह रंजन मदुगले (798) और जेफ क्रो (656) के बाद सबसे अधिक मैच में रेफरी रहने की सूची में तीसरे स्थान पर हैं। यहां तक कि भारत के महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने भी गौतम गंभीर की अगुआई वाले टीम प्रबंधन पर निशाना साधते हुए कहा था कि कन्कशन सब्स्टिट्यूट को अनुमति देना सही नहीं था।
क्रिस ब्रॉड से यह पूछे जाने पर कि पिछले साल मई में ओवल में इंग्लैंड बनाम पाकिस्तान मैच में वह खुद रेफरी क्यों थे? ब्रॉड ने कुछ भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। ब्रॉड खेल में सबसे सम्मानित आईसीसी अधिकारियों में से एक हैं। वह अब तक अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर 622 मैचों में रेफरी रह चुके हैं। इस सूची में वह रंजन मदुगले (798) और जेफ क्रो (656) के बाद सबसे अधिक मैच में रेफरी रहने की सूची में तीसरे स्थान पर हैं। यहां तक कि भारत के महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने भी गौतम गंभीर की अगुआई वाले टीम प्रबंधन पर निशाना साधते हुए कहा था कि कन्कशन सब्स्टिट्यूट को अनुमति देना सही नहीं था।
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गावस्कर ने क्या कहा था?
गावस्कर ने टेलीग्राफ कॉलम में लिखा, 'पुणे के खिलाफ मैच में दुबे ने अंत तक बल्लेबाजी की, जबकि गेंद पहले ही उनके हेल्मेट पर लग चुकी थी। इसलिए स्पष्ट रूप से उन्हें चोट नहीं लगी थी। इसलिए कन्कशन सब्स्टिट्यूट की अनुमति देना ही सही नहीं था। हां, अगर बल्लेबाजी करते समय उनकी मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता तो कोई विकल्प हो सकता था, लेकिन वह केवल फील्डिंग के लिए होता और वह गेंदबाजी नहीं कर सकता था। इसके अलावा माइकल वॉन, एलिस्टेयर कुक और हर्षा भोगले जैसे दिग्गज भी प्रतिक्रिया दे चुके हैं।
गावस्कर ने टेलीग्राफ कॉलम में लिखा, 'पुणे के खिलाफ मैच में दुबे ने अंत तक बल्लेबाजी की, जबकि गेंद पहले ही उनके हेल्मेट पर लग चुकी थी। इसलिए स्पष्ट रूप से उन्हें चोट नहीं लगी थी। इसलिए कन्कशन सब्स्टिट्यूट की अनुमति देना ही सही नहीं था। हां, अगर बल्लेबाजी करते समय उनकी मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता तो कोई विकल्प हो सकता था, लेकिन वह केवल फील्डिंग के लिए होता और वह गेंदबाजी नहीं कर सकता था। इसके अलावा माइकल वॉन, एलिस्टेयर कुक और हर्षा भोगले जैसे दिग्गज भी प्रतिक्रिया दे चुके हैं।