कोरोना काल में ठप पड़ी क्रिकेट गतिविधियां 8 जुलाई से इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच पहले टेस्ट से दोबारा शुरू हुई। खाली स्टेडियम, बिना दर्शकों के शोर, सामजिक दूरी का पालन, गेंद चमकाने के लिए लार की जगह सिर्फ पसीने का इस्तेमाल जैसे कई नए नियमों ने इस मैच को ऐतिहासिक बना दिया था और मेहमान कैरेबियाई टीम ने इसे अपने नाम कर यादगार भी बना दिया।
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स्टुअर्ट ब्रॉड और बेन स्टोक्स
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खेल की बात करें तो आखिरी दिन तक यह समझना मुश्किल था कि मैच किसके पाले में जाएगा। किसी दिन मेजबान इंग्लैंड हावी होता तो कभी वेस्टइंडीज पलटवार करता, लेकिन पांचवें और आखिरी दिन जर्मेन ब्लैकवुड की साहसिक 95 रन की पारी ने वेस्टइंडीज को यह मैच दिलाया। कैरेबियाई टीम ने अपने दल में अतिरिक्त बल्लेबाज खिलाया तो इंग्लैंड ने स्टुअर्ट ब्रॉड जैसे दिग्गज पेसर को प्लेइंग इलेवन से ही बाहर कर दिया।
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स्टुअर्ट ब्रॉड
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अब मैच हारने के बावजूद इंग्लैंड के कार्यवाहक कप्तान बेन स्टोक्स को अंतिम एकादश से ब्रॉड को बाहर रखने के अपने फैसले पर जरा भी खेद नहीं। खुद को बाहर किए जाने पर ब्रॉड ने तीखी प्रतिक्रिया जताई थी। ब्रॉड ने कहा था कि वह इस फैसले से 'गुस्से में तथा हताश और निराश हैं।' स्टोक्स ने इसे एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया बताया।
स्टोक्स ने बीबीसी स्पोर्ट से कहा, 'स्टुअर्ट का इंटरव्यू शानदार था, जिस खिलाड़ी ने 100 से अधिक टेस्ट मैच खेले हों और ढेर सारे विकेट लिए हो उसकी तरह की भावना और खेलने की तीव्र इच्छा लाजवाब है। जहां तक चयन की बात है तो अगर हम इस पर खेद व्यक्त करते हैं तो इससे उन खिलाड़ियों के पास अच्छा संदेश नहीं जाएगा जो इस मैच में खेले थे। हमने वह फैसला किया जो इस खेल में आगे हमारे लिए फायदेमंद हो सकता है।
138 टेस्ट मैचों में 485 विकेट और 121 वन-डे में 178 विकेट लेने वाले ब्रॉड पर स्टोक्स आगे कहते हैं कि, 'आप फैसला करते हैं और आपको उन पर कायम रहना चाहिए। मैं इस तरह का इंसान नहीं हूं जो उन पर खेद व्यक्त करूं। हम सभी जानते हैं कि हमने कहां गलतियां की। पहली पारी में बड़ा स्कोर बनाने के लिए आपको अच्छा प्रदर्शन करना होता है। यह मायने नहीं रखता कि परिस्थितियां कैसी हैं।'