भारत की महिला क्रिकेट स्टार मिताली राज आज अपना 37वां जन्मदिन मना रही हैं। पुरुषों में अगर सचिन तेंदुलकर महान हैं तो भारत की महिला क्रिकेट में मिताली को भी वही दर्जा प्राप्त है। भारतीय महिला क्रिकेट को बुलंदियों पर ले जाने और विश्वस्तरीय टीम बनाने में कप्तान मिताली का बड़ा योगदान है। 20 साल के अपने लंबे और रिकॉर्ड से भरे करियर में मिताली ने भारतीय महिला टीम को हमेशा मजबूती दी है।
3 दिसंबर 1982 को राजस्थान के जोधपुर में जन्मीं मिताली कभी एक नृत्यांगना बनना चाहती थीं और उसी क्षेत्र में अपना करियर भी बनाना चाहती थीं लेकिन फिर उन्होंने क्रिकेट का बल्ला थाम लिया और फिर दुनियाभर की गेंदबाजों को अपने खेल से नचाना शुरू किया।
मिताली ने साल 1999 में जब आयरलैंड के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया तब उनकी उम्र मजह 17 साल थी। उन्होंने तब पहली बार अंतरराष्ट्रीय वन-डे मैच खेला।
सैनिक परिवार से आने वाली मिताली जब आठ साल की थीं तब वो शास्त्रीय नृत्य की शिक्षा हासिल कर रही थीं। लेकिन फिर उन्होंने कुछ साल बाद महज 10 साल की उम्र में हाथों में बल्ला थाम लिया और बड़े भाई के साथ हैदराबाद के सेंट जोंस स्कूल में क्रिकेट की कोचिंग लेनी शुरू कर दी। क्रिकेट का जूनून ऐसा चढ़ा कि उन्होंने पुरुषों के साथ भी खेलना शुरू कर दिया।
मिताली ने अपने आगाज से दुनिया को अपनी ताकत का अहसास करा दिया था जब उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ अपने डेब्यू मैच में 114 रनों की नाबाद पारी खेली और रेशमा गाँधी के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 258 रनों की अटूट साझेदारी कर डाली।
इसके बाद मिताली ने साल 2002 में टेस्ट क्रिकेट में कदम रखा और करियर के तीसरे ही टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ महिलाओं के टेस्ट क्रिकेट की सबसे लंबी पारी खेलकर विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उन्होंने इस मैच में केरन रोल्टन के 209 रनों के रिकॉर्ड को तोड़कर 407 गेंदों में 214 रनों की पारी खेली। उनके नाम यह रिकॉर्ड दो साल तक रहा।