क्रिकेट की दुनिया में लंबे समय से खिलाड़ियों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ की भूमिकाएं पुरुषों के दबदबे वाली रही हैं। हालांकि, अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। महिला क्रिकेट से जुड़ी कई पूर्व खिलाड़ी और विशेषज्ञ पुरुषों की पेशेवर क्रिकेट टीमों के साथ काम कर रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव कोचिंग के स्तर पर दिखाई दे रहा है।
इंग्लैंड की पूर्व विकेटकीपर सारा टेलर ने हाल ही में इतिहास रचते हुए सीनियर पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली। वह न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए इंग्लैंड की पुरुष टीम की फील्डिंग कोच नियुक्त की गईं। यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि वह सीनियर पुरुष अंतरराष्ट्रीय सेटअप में कोच बनने वाली पहली महिला बनीं। इससे पहले भी सारा टेलर फ्रेंचाइजी क्रिकेट में कोचिंग की भूमिका निभा चुकी हैं। वह टीम अबू धाबी और मैनचेस्टर ओरिजिनल्स जैसी टीमों के साथ भी काम कर चुकी हैं।
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सारा टेलर
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सारा टेलर ने खोला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दरवाजा
सारा टेलर का क्रिकेट करियर खुद बेहद शानदार रहा है। इंग्लैंड के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर खेलने के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे पुरुष क्रिकेट के सेटअप में भी अपनी जगह बनाई। न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में इंग्लैंड के पुरुष सीनियर सेटअप का हिस्सा बनना उनके कोचिंग करियर का बड़ा पड़ाव है। उनकी नियुक्ति ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि अगर विशेषज्ञता और अनुभव मौजूद हो तो कोचिंग की भूमिका को सिर्फ पुरुषों तक सीमित क्यों रखा जाए? सारा की कहानी यह दिखाती है कि महिला क्रिकेटरों के लिए खेल से जुड़ी भूमिकाओं का दायरा अब सिर्फ महिला टीमों तक सीमित नहीं है।
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कैथरीन डाल्टन
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कैथरीन डाल्टन बनीं पुरुष फ्रेंचाइजी क्रिकेट में तेज गेंदबाजी कोच
इस बदलाव का एक और बड़ा उदाहरण कैथरीन डाल्टन हैं। उन्हें पाकिस्तान सुपर लीग की टीम मुल्तान सुल्तांस के तेज गेंदबाजी कोच के रूप में नियुक्त किया गया था। यह नियुक्ति इसलिए ऐतिहासिक रही क्योंकि वह पुरुषों की बड़ी पेशेवर फ्रेंचाइजी क्रिकेट में तेज गेंदबाजी कोच बनने वाली पहली महिला बनीं। तेज गेंदबाजी जैसी विशेषज्ञ भूमिका में उनकी नियुक्ति ने यह साफ किया कि कोचिंग में किसी व्यक्ति की उपयोगिता सिर्फ उसके लिंग से तय नहीं होती। तकनीकी समझ, अनुभव और खिलाड़ियों के साथ काम करने की क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
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एलेक्स हार्टली
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एलेक्स हार्टली ने भी पुरुष टीम के साथ संभाली जिम्मेदारी
इंग्लैंड की पूर्व क्रिकेटर एलेक्स हार्टली भी पुरुष फ्रेंचाइजी क्रिकेट में कोचिंग की भूमिका निभा चुकी हैं। उन्होंने मुल्तान सुल्तांस के साथ स्पिन गेंदबाजी विशेषज्ञ कोच के तौर पर काम किया। इस तरह एक ही पुरुष फ्रेंचाइजी सेटअप में महिलाओं की विशेषज्ञता का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिला। कैथरीन डाल्टन ने तेज गेंदबाजी और एलेक्स हार्टली ने स्पिन गेंदबाजी से जुड़े काम में योगदान दिया। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में पुरुष क्रिकेट टीमों के कोचिंग स्टाफ में महिला विशेषज्ञों की मौजूदगी और बढ़ सकती है।
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राजल अरोड़ा
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सिर्फ कोचिंग नहीं, बैकरूम में भी महिलाओं की मजबूत मौजूदगी
महिलाओं की भूमिका सिर्फ कोचिंग तक सीमित नहीं है। भारतीय क्रिकेट में राजल अरोड़ा जैसी महिला पेशेवर पुरुष राष्ट्रीय टीम के मीडिया और कंटेंट ऑपरेशन का हिस्सा रही हैं। उन्होंने भारतीय पुरुष टीम के कई बड़े दौरों और विश्व कप अभियानों के दौरान टीम के साथ काम किया है। इसके अलावा क्रिकेट के बैकरूम स्टाफ में भी महिलाओं की मौजूदगी लगातार बढ़ी है। फिजियोथेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स मसाज थेरेपिस्ट, मीडिया अधिकारी और लॉजिस्टिक्स से जुड़े पदों पर महिलाएं पुरुष टीमों के साथ काम करती रही हैं।