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पुरुषों के खेल में महिलाओं का बढ़ता राज!: इन तीन क्रिकेटरों ने कोच बनकर बनाई अपनी अलग पहचान; नई मिसाल पेश की

Sat, 12 Sep 2026 08:27 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Sat, 12 Sep 2026 08:27 AM IST
सार

क्रिकेट में अब महिलाओं की भूमिका सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रह गई है। कोचिंग से लेकर फ्रेंचाइजी क्रिकेट और टीम के बैकरूम स्टाफ तक महिलाएं पुरुष क्रिकेट में अपनी जगह बना रही हैं। सारा टेलर, कैथरीन डाल्टन और एलेक्स हार्टली ने इस बदलाव को नई पहचान दी है।

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3 Women Cricketers Breaking Barriers in Men’s Cricket Coaching
पुरुष टीमों में महिला कोच की बढ़ती संख्या - फोटो : Twitter
क्रिकेट की दुनिया में लंबे समय से खिलाड़ियों, कोचों और सपोर्ट स्टाफ की भूमिकाएं पुरुषों के दबदबे वाली रही हैं। हालांकि, अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है। महिला क्रिकेट से जुड़ी कई पूर्व खिलाड़ी और विशेषज्ञ पुरुषों की पेशेवर क्रिकेट टीमों के साथ काम कर रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव कोचिंग के स्तर पर दिखाई दे रहा है।


इंग्लैंड की पूर्व विकेटकीपर सारा टेलर ने हाल ही में इतिहास रचते हुए सीनियर पुरुष अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कोचिंग की जिम्मेदारी संभाली। वह न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए इंग्लैंड की पुरुष टीम की फील्डिंग कोच नियुक्त की गईं। यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि वह सीनियर पुरुष अंतरराष्ट्रीय सेटअप में कोच बनने वाली पहली महिला बनीं। इससे पहले भी सारा टेलर फ्रेंचाइजी क्रिकेट में कोचिंग की भूमिका निभा चुकी हैं। वह टीम अबू धाबी और मैनचेस्टर ओरिजिनल्स जैसी टीमों के साथ भी काम कर चुकी हैं।
3 Women Cricketers Breaking Barriers in Men’s Cricket Coaching
सारा टेलर - फोटो : AP/Twitter
सारा टेलर ने खोला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दरवाजा
सारा टेलर का क्रिकेट करियर खुद बेहद शानदार रहा है। इंग्लैंड के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज के तौर पर खेलने के बाद उन्होंने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा और धीरे-धीरे पुरुष क्रिकेट के सेटअप में भी अपनी जगह बनाई। न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में इंग्लैंड के पुरुष सीनियर सेटअप का हिस्सा बनना उनके कोचिंग करियर का बड़ा पड़ाव है। उनकी नियुक्ति ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि अगर विशेषज्ञता और अनुभव मौजूद हो तो कोचिंग की भूमिका को सिर्फ पुरुषों तक सीमित क्यों रखा जाए? सारा की कहानी यह दिखाती है कि महिला क्रिकेटरों के लिए खेल से जुड़ी भूमिकाओं का दायरा अब सिर्फ महिला टीमों तक सीमित नहीं है।
3 Women Cricketers Breaking Barriers in Men’s Cricket Coaching
कैथरीन डाल्टन - फोटो : AP/Twitter
कैथरीन डाल्टन बनीं पुरुष फ्रेंचाइजी क्रिकेट में तेज गेंदबाजी कोच
इस बदलाव का एक और बड़ा उदाहरण कैथरीन डाल्टन हैं। उन्हें पाकिस्तान सुपर लीग की टीम मुल्तान सुल्तांस के तेज गेंदबाजी कोच के रूप में नियुक्त किया गया था। यह नियुक्ति इसलिए ऐतिहासिक रही क्योंकि वह पुरुषों की बड़ी पेशेवर फ्रेंचाइजी क्रिकेट में तेज गेंदबाजी कोच बनने वाली पहली महिला बनीं। तेज गेंदबाजी जैसी विशेषज्ञ भूमिका में उनकी नियुक्ति ने यह साफ किया कि कोचिंग में किसी व्यक्ति की उपयोगिता सिर्फ उसके लिंग से तय नहीं होती। तकनीकी समझ, अनुभव और खिलाड़ियों के साथ काम करने की क्षमता ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
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3 Women Cricketers Breaking Barriers in Men’s Cricket Coaching
एलेक्स हार्टली - फोटो : AP/Twitter
एलेक्स हार्टली ने भी पुरुष टीम के साथ संभाली जिम्मेदारी
इंग्लैंड की पूर्व क्रिकेटर एलेक्स हार्टली भी पुरुष फ्रेंचाइजी क्रिकेट में कोचिंग की भूमिका निभा चुकी हैं। उन्होंने मुल्तान सुल्तांस के साथ स्पिन गेंदबाजी विशेषज्ञ कोच के तौर पर काम किया। इस तरह एक ही पुरुष फ्रेंचाइजी सेटअप में महिलाओं की विशेषज्ञता का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिला। कैथरीन डाल्टन ने तेज गेंदबाजी और एलेक्स हार्टली ने स्पिन गेंदबाजी से जुड़े काम में योगदान दिया। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में पुरुष क्रिकेट टीमों के कोचिंग स्टाफ में महिला विशेषज्ञों की मौजूदगी और बढ़ सकती है।
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3 Women Cricketers Breaking Barriers in Men’s Cricket Coaching
राजल अरोड़ा - फोटो : AP/Twitter
सिर्फ कोचिंग नहीं, बैकरूम में भी महिलाओं की मजबूत मौजूदगी
महिलाओं की भूमिका सिर्फ कोचिंग तक सीमित नहीं है। भारतीय क्रिकेट में राजल अरोड़ा जैसी महिला पेशेवर पुरुष राष्ट्रीय टीम के मीडिया और कंटेंट ऑपरेशन का हिस्सा रही हैं। उन्होंने भारतीय पुरुष टीम के कई बड़े दौरों और विश्व कप अभियानों के दौरान टीम के साथ काम किया है। इसके अलावा क्रिकेट के बैकरूम स्टाफ में भी महिलाओं की मौजूदगी लगातार बढ़ी है। फिजियोथेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स मसाज थेरेपिस्ट, मीडिया अधिकारी और लॉजिस्टिक्स से जुड़े पदों पर महिलाएं पुरुष टीमों के साथ काम करती रही हैं।
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