कोरोना संकट और लॉकडाउन-4: क्यों मजबूर है देश का मजदूर? इस त्रासदी की भरपाई कैसे होगी?

Ramesh sarafरमेश सर्राफ Updated Thu, 21 May 2020 11:22 AM IST
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बड़ी संख्या में मजदूर पैदल ही अपने घरों की तरफ निकल पड़े हैं
बड़ी संख्या में मजदूर पैदल ही अपने घरों की तरफ निकल पड़े हैं - फोटो : PTI

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सार

  • सड़क हादसों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 
  • 25 मार्च से 16 मई तक देश में करीबन 2000 सड़क हादसे हुए हैं।
  • लॅाकडाउन से सबसे अधिक प्रभावित देश का मजदूर वर्ग हुआ है।
  • मजदूरों के रहने के लिए सरकार द्धारा बनाए गए राहत केंद्रों की हालत बहुत खराब थी।

विस्तार

देश में 24 मार्च  की रात से तालाबंदी (लॅाकडाउन) लागू है। अब तक अलग-अलग अवधि के लिए पूरे देश में चार चरणों में तालाबंदी लगाई जा चुकी है। तालाबंदी के चलते देश में सभी कल-कारखाने व अन्य व्यवसायिक गतिविधियां ठप पड़ी हैंं। इस कारण देश के बड़े महानगरों एवं औद्योगिक क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मजदूर अपने घरों की तरफ लौट रहे हैं।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकारों को बसों के माध्यम से मजदूरों को अपने घरों तक पहुंचाने की छूट दे रखी है। इसके साथ ही मजदूरों के घर लौटने की बढ़ती तादाद को देखते हुए एक मई से देशभर में श्रमिक विशेष रेलगाड़ियां चलाई जा रही है। ताकि प्रवासी श्रमिक आसानी से अपने घर लौट सके। लेकिन रेल में सीट नहीं मिलने से परेशान होकर देश में बड़ी संख्या में मजदूर पैदल ही अपने घरों की तरफ निकल पड़े हैं।
आज देश भर में  हजारों की संख्या में मजदूर सड़कों पर भूखे, प्यासे, नंगे पांव अपने परिवार सहित पैदल चलते हुए नजर आ रहे हैं। सड़कों पर पैदल चलने के कारण मजदूरों के साथ आए दिन सड़क हादसे भी हो रहे हैं। जिनमें काफी संख्या में मजदूर मारे गए हैं।
हाल ही में उत्तर प्रदेश के औरैया में बिहार झारखंड से लौट रहे मजदूरों से भरे ट्रक से एक दूसरे ट्रक की टक्कर हो गई जिससे 25 मजदूरों की मौत हो गई। गत् दिनों महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास ट्रेन की चपेट में आने से 16 मजदूर कटकर मारे गए थे।

घर लौटने का साधन नहीं मिलने के कारण मध्य प्रदेश के रहने वाले ये लोग रेल की पटरियों के किनारे पैदल ही अपने घरों की तरफ चल पड़े थे तथा थकान के कारण रेल की पटरी पर ही सो गए थे। जिस कारण वहां से गुजर रही एक मालगाड़ी से कट गए। सभी लोग जालना में एक कंपनी में काम करते थे।
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देश में तालाबंदी के बाद हर गुजरते दिन के साथ ही....

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