विदेश जाने का सपना देख रहे देशभर के स्टूडेंट्स के लिए बहुत बुरी खबर है। कई स्टूडेंट्स का भविष्य भी खतरे में पड़ गया है। जानकारी पढ़ें और अलर्ट रहें...
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सांकेतिक तस्वीर
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दरअसल, ऑस्ट्रेलिया में भारतीय विद्यार्थियों के भविष्य पर खतरे की तलवार लटक गयी है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया सरकार ने वहां पर पीआर यानी परमानेंट रिहायश के लिए अब शर्त 60 अंक से 65 कर दी है। इससे उन विद्यार्थियों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है, जो पीआर होने का सपना संजोकर ऑस्ट्रेलिया में स्टडी वीजा पर पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही ऑस्ट्रेलिया जाने वाले युवकों को भी खासा झटका लगा है।
ऑस्ट्रेलिया में विदेश से आकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों में दूसरे नंबर पर भारत के विद्यार्थी हैं। ऑस्ट्रेलिया के अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा बाजार में भारतीयों का योगदान करीब 400 अरब रुपये का है। आस्ट्रेलियन एजुकेशन इंटरनेशनल (एईआई) के सूत्रों के अनुसार पिछले साल करीब 40 हजार विद्यार्थियों ने ऑस्ट्रेलियाई शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लिया।
ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में 47 प्रतिशत भारतीय विद्यार्थी उच्चस्तरीय पाठ्यक्रम कर रहे हैं। 100 से भी अधिक विद्यार्थी पीएचडी कर रहे हैं और दो-तिहाई विद्यार्थी मास्टर डिग्री में शिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इन विद्यार्थियों का कंप्यूटर, इंजीनियरिंग जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर रुझान कम है, बिजनेस और नर्सिंग, हार्टिकल्चर, एग्रीकल्चर जैसे विषयों के पाठ्यक्रम लोकप्रिय हो रहे हैं।
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ऑस्ट्रेलिया में डिग्री की फीस प्रति वर्ष 25 हजार डालर के करीब है, जोकि भारतीय मुद्रा में 12 लाख से अधिक बनती है। डिग्री कोर्स तीन साल का होता है, इसके बाद विद्यार्थी दो साल का वर्क परमिट ले सकता है। वर्क परमिट यानी नौकरी के दौरान ही 900 घंटे पूरे होने पर उम्मीदवार पीआर के लिए आवेदन कर सकता है। सरकार की तरफ से डिग्री, इंग्लिश, उम्र, तजुर्बा, पिछड़े इलाके में रिहायश करने के लिए प्वाइंट सिस्टम बनाकर पीआर दी जाती है।