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विदेश जाने का सपना देख रहे स्टूडेंट्स पढ़ें बुरी खबर, कई का भविष्य खतरे में...

Wed, 18 Jul 2018 07:59 AM IST
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Updated Wed, 18 Jul 2018 07:59 AM IST
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Students shocked at study visa in Australia, government strong students visa
सांकेतिक तस्वीर
विदेश जाने का सपना देख रहे देशभर के स्टूडेंट्स के लिए बहुत बुरी खबर है। कई स्टूडेंट्स का भविष्य भी खतरे में पड़ गया है। जानकारी पढ़ें और अलर्ट रहें...

 
Students shocked at study visa in Australia, government strong students visa
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
दरअसल, ऑस्ट्रेलिया में भारतीय विद्यार्थियों के भविष्य पर खतरे की तलवार लटक गयी है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया सरकार ने वहां पर पीआर यानी परमानेंट रिहायश के लिए अब शर्त 60 अंक से 65 कर दी है। इससे उन विद्यार्थियों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है, जो पीआर होने का सपना संजोकर ऑस्ट्रेलिया में स्टडी वीजा पर पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही ऑस्ट्रेलिया जाने वाले युवकों को भी खासा झटका लगा है।
Students shocked at study visa in Australia, government strong students visa
ऑस्ट्रेलिया में विदेश से आकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों में दूसरे नंबर पर भारत के विद्यार्थी हैं। ऑस्ट्रेलिया के अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा बाजार में भारतीयों का योगदान करीब 400 अरब रुपये का है। आस्ट्रेलियन एजुकेशन इंटरनेशनल (एईआई) के सूत्रों के अनुसार पिछले साल करीब 40 हजार विद्यार्थियों ने ऑस्ट्रेलियाई शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लिया। 
 
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Students shocked at study visa in Australia, government strong students visa
सांकेतिक तस्वीर
ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में 47 प्रतिशत भारतीय विद्यार्थी उच्चस्तरीय पाठ्यक्रम कर रहे हैं। 100 से भी अधिक विद्यार्थी पीएचडी कर रहे हैं और दो-तिहाई विद्यार्थी मास्टर डिग्री में शिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इन विद्यार्थियों का कंप्यूटर, इंजीनियरिंग जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर रुझान कम है, बिजनेस और नर्सिंग, हार्टिकल्चर, एग्रीकल्चर जैसे विषयों के पाठ्यक्रम लोकप्रिय हो रहे हैं।
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Students shocked at study visa in Australia, government strong students visa
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : source
ऑस्ट्रेलिया में डिग्री की फीस प्रति वर्ष 25 हजार डालर के करीब है, जोकि भारतीय मुद्रा में 12 लाख से अधिक बनती है। डिग्री कोर्स तीन साल का होता है, इसके बाद विद्यार्थी दो साल का वर्क परमिट ले सकता है। वर्क परमिट यानी नौकरी के दौरान ही 900 घंटे पूरे होने पर उम्मीदवार पीआर के लिए आवेदन कर सकता है। सरकार की तरफ से डिग्री, इंग्लिश, उम्र, तजुर्बा, पिछड़े इलाके में रिहायश करने के लिए प्वाइंट सिस्टम बनाकर पीआर दी जाती है। 
 
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