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केदारनाथ धाम की ऐसी बातें, जो हर शिवभक्त को जाननी चाहिए

Sat, 13 May 2017 03:59 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 13 May 2017 03:59 PM IST
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intresting facts of kedarnath temple
kedarnath

केदारनाथ के बारे में एक कथा प्रचलित है कि जब देवताओं की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव बैल रुप में प्रकट हुए तो उन्होंने कहा किसे चीरू और किसे फाडूं। जानिए फिर क्या हुआ। साथ ही कुछ और रोचक तथ्य।


 

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केदारनाथ के बारे में एक कथा के अनुसार, असुरों से बचने के लिए देवता गणों ने भोलेनाथ की आराधना की थी। जिसके बाद शिव बैल रूप में प्रकट हुए और उन्होंने पूछा 'कोदारम' (किसी चीरूं किसे फाडूं)। इसके बाद शिव ने अपने सींगों और खुरों से असुरों का नाश किया और उन्हें मंदाकिनी नदी में फेंक दिया। कोदारम् से ही इस जगह का केदारनाथ पड़ गया।

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केदारनाथ मंदिर कितना पुराना है इसके बारे में कोई प्रमाण नहीं है। हालांकि एक हजार वर्षों से केदारनाथ धाम की तीर्थयात्रा का सिलसिला निरंतर जारी है।

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केदारनाथ के मुख्य पुजारी कर्नाटक के वीराशैवा समुदाय से वास्ता रखते हैं और उन्हें 'रावल' नाम से पुकारा जाता है। रावल प्रमुख पुजारी होने के बावजूद दूसरे मंदिरों की तरह केदारनाथ में खुद से पूजा नहीं करते हैं, बल्कि वो दूसरे पंडितों को पूजा करने के निर्देश देते हैं।

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इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना का इतिहास संक्षेप में यह है कि हिमालय के केदार श्रृंग पर भगवान विष्णु के अवतार महातपस्वी नर और नारायण ऋषि तपस्या करते थे। उनकी आराधना से प्रसन्न होकर भगवान शंकर प्रकट हुए और उनके प्रार्थनानुसार ज्योतिर्लिंग के रूप में सदा वास करने का वर प्रदान किया।

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