बीएचयू में चल रहे संस्कृति महोत्सव के चौथे दिन का शाम सुमधुर स्वरों की चासनी में डूब गया। मंगलवार की शाम महामना की बगिया में बनारस घराने के जाने-माने ख्याल गायक मिश्र बंधुओं की जोड़ी , पद्मभूषण डॉ. एम राजम की वायलिन और निजामी बंधुओं ने जब अपनी प्रस्तुति दी तो दर्शक झूम उठे।
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वायलिन की मिठास की पर्याय बन चुकी पद्मभूषण डॉ. एम राजम
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वायलिन की मिठास की पर्याय बन चुकी पद्मभूषण डॉ. एम राजम ने सधे अंदाज में छोटी-छोटी गतों पर लयकारी से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा।
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निजामी बंधु की कव्वाली से शाम हुई खुशरंग
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सूफी संगीत के उस्ताद निजामी बंधु ने साम में चार चांद लगा दिया। एक से बढ़कर एक कव्वाली सुनाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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संस्कृति महोत्सव के मुरीद हुए विदेशी
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बीएचयू में चल रहे संस्कृति महोत्सव का चौथे दिन शाम को हुई इन प्रस्तुतियों को देखने के लिए पूरा सभागार खचाखच भरा रहा। संस्कृति महोत्सव में बड़ी मात्रा में विदेशी सैलानी आ रहे हैं।
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संगीत प्रेमी पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह के हाल में कई बार इतरा उठे।
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बनारस घराने के जाने-माने ख्याल गायक मिश्र बंधुओं की जोड़ी ने मंगलवार की शाम महामना की बगिया में सुमधुर स्वरों की चासनी से चार चांद लगा दिया। घरानेदार बंदिशें, मोहक अलापचारी और गमक के साथ जब उन्होंने स्वरों का समन्वय किया तो संगीत प्रेमी पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह के हाल में कई बार इतरा उठे।