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नवरात्रि में देवी नहीं बल्कि परेतिन की पूजा: छत्तीसगढ़ में है यह अनोखा मंदिर, जानें क्या है इसके पीछे की कहानी

Wed, 09 Oct 2024 12:29 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Wed, 09 Oct 2024 12:29 PM IST
सार

आज हम आपको छत्तीसगढ़ के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएंगे, जहां नवरात्रि में मां दुर्गा की नहीं बल्कि यहां परेतिन दाई की पूजा होती है। अमर उजाला की टीम ने जब मंदिर पहुंचकर गांव वालों से बात की तो उन्होंने दिलचस्प कहानी बताई।

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In Navratri not Goddess but paretin is worshipped This unique temple in Chhattisgarh
मंदिर परेतिन दाई, झींका, बालोद - फोटो : अमर उजाला

यह अनोखा मंदिर छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के अर्जुन्दा नगर पंचायत से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर में परेतिन की पूजा होती है। एक ओर नवरात्रि में नौ दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। दूसरी ओर एक गांव में नौ दिनों तक परेतिन दाई की पूजा होती है। साथ ही 108 मनोकामना ज्योति कलश भी जलाया जाता है। यह मंदिर नवरात्रि पर आस्था का केंद्र बना हुआ है। 

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108 मनोकामना ज्योति कलश - फोटो : अमर उजाला
चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में परेतिन माता के दरबार में विशेष आयोजन किए जाते हैं। 108 मनोकामना ज्योति कलश स्थापना की जाती है। नवरात्र के नौ दिन बड़ी संख्या में भक्तों का तांता लगा रहता है। भले ही मान्यता अनूठी हो, लेकिन सैकड़ों सालों से चली आ रही परंपरा और मान्यता आज भी इस गांव में कायम है।
 
In Navratri not Goddess but paretin is worshipped This unique temple in Chhattisgarh
भक्तों की लगती है तांता - फोटो : अमर उजाला
भक्तों की लगती है तांता
भूत-प्रेत के नाम सुनते ही आम तौर पर लोग डर जाते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के एक गांव झिंका में परेतिन का मंदिर बनाया गया है, जहां उसकी पूजा की जाती है। नवरात्र में लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। जिन्हें परेतिन दाई के नाम से जाना जाता है। परेतिन दाई का नाम सुनकर लोग दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं और मनोकामना के लिए ज्योति कलश जलाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, दूसरे-दूसरे जिले से भी मां की दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। 
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परेतिन माता - फोटो : अमर उजाला
यह है परेतिन दाई की कहानी
गांव की रहस्मय कहानी तब सामने आई जब अमर उजाला की टीम ने गांव के लोगों से बातचीत की। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ सालों पहले जब मार्ग से होकर गुजरने वाले राहगीर इस स्थान को बिना प्रणाम किए यहां से गुजरते थे, तो उनके साथ कुछ ना कुछ अनहोनी या दुर्घटना हो जाती थी। तब से राहगीर इस स्थान पर रुककर वर्षों पुरानी नीम पेड़ को प्रणाम कर गुजरते हैं। 
 
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पूजा करते हुए पंडित - फोटो : अमर उजाला
परेतिन दाई को चढ़ाते हैं भेंट 
इसके साथ ही अपने पास रखें समान का कुछ अंश चढ़ा कर आगे बढ़ते थे। परिणामस्वरूप जिसके बाद अनहोनी होना बंद हो जाता था। ऐसे नहीं करने पर उस इंसान पर अनहोनी होना तय है। अब जो भी व्यक्ति इस जगह से होकर गुजरता है अपने गाड़ी का हॉर्न बजाकर या व्यापारी व्यवसाय से जुड़े सामग्री जैसे की दूध, सब्जी,ईटा, गिट्टी, रेत जैसे तमाम चीजों का कुछ अंश परेतिन दाई को भेंट करते हैं। इसके बाद ही वहां से आगे बढ़ते हैं।
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