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CG: अटल निर्माण वर्ष के रूप में मनेगी 'छत्तीसगढ़ की रजत जयंती': हर साल 3 से 13 दिसंबर तक मनेगा 'जनादेश परब'

Fri, 13 Dec 2024 09:51 PM IST
ललित कुमार सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर
अमर उजाला ब्यूरो, रायपुर Published by: ललित कुमार सिंह Updated Fri, 13 Dec 2024 09:51 PM IST
सार

JP Nadda Chhattisgarh Visit: छत्तीसगढ़ सरकार के एक साल पूरा होने पर शुक्रवार को जनादेश परब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सरकार की एक साल की उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि सरकार लोकहित में पूरी जवाबदेही से काम कर रही है। 

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GG Janadesh Parva: 'Chhattisgarh Silver Jubilee will be celebrated as Atal Nirman Year
जनादेश परब को संबोधित करते केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
JP Nadda Chhattisgarh Visit: छत्तीसगढ़ सरकार के एक साल पूरा होने पर शुक्रवार को जनादेश परब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सरकार की एक साल की उपलब्धियों का बखान करते हुए कहा कि सरकार लोकहित में पूरी जवाबदेही से काम कर रही है। सरकार बनने के दूसरे ही दिन कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के 18 लाख से अधिक जरूरतमंदों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति दी गई। मोदी की गारंटी के अनुरूप यहां किसानों से 3100 प्रति क्विंटल में धान खरीदी की जा रही है। किसानों को उनके हक का 3716 करोड़ रूपए धान के बकाया दो साल के बोनस का भुगतान भी किया गया है। 




 
GG Janadesh Parva: 'Chhattisgarh Silver Jubilee will be celebrated as Atal Nirman Year
नड्डा ने कहा कि हर साल 3 से 13 दिसंबर तक 'जनादेश परब' मनाया जाएगा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि जनादेश परब में घोषणा करते हुए कहा कि अब से हर साल 3 से 13 दिसंबर तक 'जनादेश परब' मनाया जाएगा। नये साल में छत्तीसगढ़ के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। राज्य निर्माता भारत रत्न अटलजी का यह शताब्दी वर्ष भी है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष को ‘अटल निर्माण वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की। अटलजी ने प्रधानमंत्री के रूप में देश में सड़कों का जाल बिछाया। उसी से प्रेरणा लेकर हम अपने रजत जयंती वर्ष में अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता में रखेंगे। उसके बाद के तीन वर्षों में भी हम अलग-अलग थीम पर काम करेंगे।
GG Janadesh Parva: 'Chhattisgarh Silver Jubilee will be celebrated as Atal Nirman Year
कार्यक्रम को संबोधित करते सीएम साय - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साल किसान भाइयों के खाते में आपकी डबल इंजिन की सरकार ने 49 हजार करोड़ रुपए डाले हैं। हमने अपने शुरुआती तीन महीनों में ही प्राथमिकता के साथ महतारी वंदन योजना का लाभ प्रदेश की माताओं-बहनों को देना आरंभ किया। 70 लाख माताओं-बहनों के खाते में महतारी वंदन योजना की अब तक 10 किश्तों में 6,530 करोड़ रुपए की राशि भेजी जा चुकी है। पहली तारीख को हम यह राशि भेज देते हैं और जैसे ही माताओं-बहनों के खाते में राशि आती है उनका चेहरा गर्व से खिल जाता है।
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GG Janadesh Parva: 'Chhattisgarh Silver Jubilee will be celebrated as Atal Nirman Year
गज माला से केंद्रीय मंत्री का स्वागत करते बीजेपी के नेतागण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
साय ने कहा कि जो रामराज्य के मूल्य हैं, वहीं हमारे लिए सुशासन के मूल्य हैं। हमने प्रशासन के हर स्तर पर सुशासन को सुनिश्चित किया है। हमने सुशासन के मूल्यों को सिस्टम में शामिल करने सुशासन एवं अभिसरण विभाग का गठन किया। सुशासन के लिए पारदर्शिता जरूरी है और इसके लिए डिजिटल गवर्नेंस शुरू कराया है। लालफीताशाही को दूर करने हमने ई-आफिस प्रणाली शुरू की है। इसमें डिजिटल माध्यम में नोटशीट आगे बढ़ती है। इससे समय-सीमा भी तय होती है और जवाबदेही भी तय हो जाती है।
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GG Janadesh Parva: 'Chhattisgarh Silver Jubilee will be celebrated as Atal Nirman Year
जनता का अभिवादन करते बीजेपी नेतागण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर और सरगुजा के विकास के बगैर छत्तीसगढ़ के विकास के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। हमने वनोपज संग्राहकों की आय बढ़ाने के लिए काम किया है। तेंदूपत्ता संग्रहण की राशि हमने 4 हजार रुपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर साढ़े 5 हजार रुपए कर दी। जनजातीय गौरव दिवस के दिन हमने राज्य के बैगा, गुनिया, सिरहा आदि को पांच-पांच हजार रुपए सम्मान निधि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बस्तर में पर्यटन कॉरिडोर का निर्माण हम कर रहे हैं। कांगेर घाटी के गांव धुड़मारास को संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन ने दुनिया के 20 चुनिंदा गांवों में शामिल किया है। बस्तर और छत्तीसगढ़ विश्व पर्यटन के मानचित्र में आ गए हैं। सरगुज़ा संभाग भी विश्व के पर्यटन नक्शे में स्थान बना रहा है। अभी-अभी जशपुर के मधेश्वर पहाड़ शिवलिंग को विश्व में सबसे बड़ी प्राकृतिक प्रतिकृति के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है।
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