फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

इस मंदिर में हिंदू-मुस्लिम एक साथ टेकते हैं माथा: पट खुलते ही पहले जलता है लोबान, फिर होती है मां चंडी की पूजा

Tue, 07 Feb 2023 08:51 PM IST
मोहनीश श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बालोद Published by: मोहनीश श्रीवास्तव Updated Tue, 07 Feb 2023 08:51 PM IST
सार

बालोद के गुंडरदेही स्थित इस मंदिर एक तस्वीर तेजी से सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। इसे लेकर तमाम तरह के भद्दे कमेंट भी किए गए हैं। पूर्व विधायक राजेंद्र कुमार राय ने कहा कि जिसने भी झगड़ा फैलाने की कोशिश की है, वह यहां के नहीं हैं। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे। 

विज्ञापन
chandi temple is an example of hindu-muslim unity in chhattisgarh balod
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है छत्तीसगढ़ का यह मंदिर। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

एक ओर जब देश में जाति और धर्म को लेकर माहौल गरमाया हुआ है, वहां छत्तीसगढ़ का एक मंदिर हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है। इस मंदिर में दोनों ही धर्म के लोग एक साथ माथा टेकते हैं। मंदिर के पट खुलते हैं तो पहले लोबान जलाई जाती है और वहां से प्रांगण में स्थित मजार के लिए चादर निकलती है। इसके बाद दोनों मिलकर मां चंडी की पूजा-अर्चना करते हैं। खास बात यह है किदेवी की मूर्ति पर इस्लामिक झंडा भी लगा हुआ है। 



chandi temple is an example of hindu-muslim unity in chhattisgarh balod
हिंदू-मुस्लिम मिलकर करते हैं इस मंदिर में पूजा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

सब मिल-जुलकर करते हैं पूजा
यह मंदिर है, बालोद जिले में गुंडरदेही के हटरी बाजार में। इसे चंडी मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर पर जहां एक और चंडी मैया की पूजा की जाती है तो वहीं दूसरी ओर सैयद बाबा का हरे रंग का पवित्र 786 का पताका भी लहरा रहा है। यहां पर सभी धर्म मिल-जुलकर पूजा अर्चना करते हैं। पूर्व विधायक और मंदिर के संस्थापक परिवार के सदस्य राजेंद्र कुमार राय ने बताया कि हिंदू मुस्लिम का टकराव कभी नहीं हुआ, सब मिलकर रहते हैं। 

chandi temple is an example of hindu-muslim unity in chhattisgarh balod
मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

100 साल पुराना है मंदिर का इतिहास
स्थानीय लोग बताते हैं कि मंदिर का इतिहास करीब 100 साल पुराना है। सैयद बाबा की पूजा और मां चंडी की पूजा भी उतनी ही पुरानी है। पुजारी खोरबाहरा राम ने बताया कि, सैयद बाबा की मजार पूर्वजों ने स्थापित की थी। जितनी पूजा माता की होती है, उतनी ही सैयद बाबा की भी। हिंदू-मुस्लिम के बीच कोई भी दूरी नहीं हैं। सैयद बाबा के नाम से दुख-दर्द दूर होते हैं। नवरात्रि पर विधि-विधान से ज्योति कलश स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
chandi temple is an example of hindu-muslim unity in chhattisgarh balod
मो. आरिफ खान, सदर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

किसी ने नहीं किया कोई दावा
गुंडरदेही नगर के सदर मोहम्मद आरिफ खान ने बताया कि, यहां पर बाबा अलाउद्दीन बगदादी और चंडी मंदिर समिति का लगाव है। यहां पर कभी कोई भेदभाव नहीं हुआ। यहां पर जो राजपरिवार है, राजा साहब है, उन्होंने मजार का एक टुकड़ा या फिर सेहरा मंदिर में रखा हुआ है। कभी किसी मुसलमान ने इसे अपना होने का दावा किया, ना किसी हिंदू ने इस मंदिर पर अपना अधिकार जताया। यह ऐसी जगह है जहां हिंदू-मुस्लिम सब एक हैं।

विज्ञापन
chandi temple is an example of hindu-muslim unity in chhattisgarh balod
अफवाह फैलने के बाद मंदिर में पहुंचे श्रद्धालु। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

तालाब से निकली थी मूर्ति और पवित्र चांद
स्थानीय लोगों ने बताया कि चंडी माता की मूर्ति स्थानीय रामसागर तालाब से निकली थी और उसके साथ ही मुस्लिम समुदाय का पवित्र चांद भी निकला। राजेंद्र कुमार राय ने बताया कि उनके दादाजी ठाकुर निहाल सिंह जो क्षेत्र के अंतिम जमीदार हुए, उन्होंने इस मंदिर की स्थापना की थी। माता की स्थापना के साथ यहां पर एक हरा पवित्र सैयद बाबा साहब का 786 वाला चादर भी लगाया गया। तब से आज तक यह मंदिर वसुधैव कुटुंबकम के तर्ज पर लोगों को जोड़े हुए है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed