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बचपन से पांव खराब, पर जज्बा इतना व्हील चेयर पर बैठ कर जीत लाया गोल्ड

Fri, 05 May 2017 09:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 05 May 2017 09:47 AM IST
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Para Badminton Player Sanjeev Kumar story
sanjeev kumar
जब कुछ कर गुजरने का जज्बा  हो तो तमाम बाधाएं बौनी साबित होती हैं। इस बात की जीती जागती मिसाल ये नौजवान, जो व्हील चेयर पर होने के बाद भी गोल्ड ले कर आया।
Para Badminton Player Sanjeev Kumar story
sanjeev kumar
चंडीगढ़ के पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी संजीव कुमार के मामले में यही हुआ। यूगांडा में आयोजित बीडब्ल्यूएफ पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल चैंपियनशिप में घिसे टायरों वाली व्हील चेयर का टायर ब्लाक हो गया और उसे ठीक करने में उनके हाथ में कील घुस गई। हाथ के लहूलुहान हो जाने के बावजूद हौसला नहीं हारा और देश के लिए गोल्ड मेडल जीत लिया। 
Para Badminton Player Sanjeev Kumar story
sanjeev kumar
पंजाब यूुनिवर्सिटी में बैडमिंटन की ट्रेनिंग ले रहे संजीव कुमार मूल रूप से पंजाब के अबोहर के रहने वाले हैं। उन्होंने पिछले दिनों यूगा़ंडा में आयोजित बीडब्ल्यूएफ पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व किया। इस टूर्नामेंट नौ देशाें के खिलाड़ियाें ने हिस्सा लिया। फाइनल में गोल्ड जीतने के लिए संजीव का काफी मशक्कत करनी पड़ी। लेकिन गोल्ड जीतना उनके लिए आसान नही था।
 
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Para Badminton Player Sanjeev Kumar story
sanjeev kumar
टूर्नामेंट में वे घिसे हुए टायरों वाली व्हील चेयर केसाथ कोर्ट पर उतरे। फाइनल मैच में अचानक उनकी व्हील चेयर के टायर ब्लॅाक हो गया। उस समय वह पहला सेट 15- 6 से पीछे थे। ब्लॉक टायर को ठीक करते समय उनके हाथ में लोहे की कील घुस गई । उनके हाथ से खून निकलने लगा। लेकिन संजीव ने हिम्मत नहीं हारी और कोर्ट पर जमे रहे। लहूलुहान हाथ से ही वे ख्ेालते रहे। उन्होंने न सिर्फ मैच में वापसी की बल्कि पहला सेट 21-10 और दूसरा सेट 21-12 से जीतकर गोल्ड मेडल जीता। 
 
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Para Badminton Player Sanjeev Kumar story
sanjeev kumar
संजीव सवाल उठाते हैं कि जब खिलाड़ियों को सरकारें सुविधा मुहैया नहीं कराएंगी, मदद नहीं करेंगी तो कैसे कोई अच्छा प्रदर्शन करेगा, मेडल जीतेगा।  संजीव कुमार ने बताया कि वह गरीब परिवार से आते हैं। उनके घर की आर्थिक हालत ऐसी नहीं है कि वह व्हील चेयर खरीद सकें। एक दोस्त से 2008 में 20 हजार रुपये में पुरानी व्हील चेयर खरीदकर दी। उस पर सवार होकर वह आजतक टूर्नामेंटों में शिरकत करते  हैं। 
 
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