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मोहम्मद रफीः फकीरों की नकल करते-करते बने फनकार, एक रुपया लेते थे फीस...गाए 26 हजार गाने
Mon, 24 Dec 2018 10:19 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 24 Dec 2018 10:19 AM IST
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मोहम्मद रफी
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बॉलीवुड के मशहूर फनकार मोहम्मद रफी ने कैसे सीखा गायन कि वे दुनिया के नामी फनकार बन गए। उन्होंने अपने जीवन काल में कुछ 26 हजार गाने गए, पढ़ें खास बातें।
मोहम्मद रफी
बहुत ही कम लोग इस बात को जानते हैं कि मधुर आवाज के धनी मोहम्मद रफी को प्यार से लोग 'फेकू' कहकर बुलाते थे। कहा जाता है कि रफी साहब ने अपने गांव में फकीर के गानों की नकल करते-करते गाना गाना सीखा था। मोहम्मद रफी ने अपनी पहली परफॉर्मेंस बतौर गायक 13 साल की उम्र में दी थी। के एल सहगल ने उन्हें लाहौर में एक कंसर्ट में गाने की अनुमति दी थी।
मोहम्मद रफी
हिंदी सिनेमाजगत में चार दशक से भी ज्यादा समय तक लोगों के दिलों पर कब्जा जमाने वाले मशहूर गायक मोहम्मद रफी का जन्मदिन 24 दिसंबर को है। 31 जुलाई को वे दुनिया से चले गए, लेकिन उनके गाने आज भी लोगों की जुबां पर आते ही मानों समां सा बन जाता है। मोहम्मद रफी बॉलीवुड का वह कोहिनूर हैं, जिसकी चमक से आज भी बॉलीवुड की गलियां रोशन हैं।
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मोहम्मद रफी
मोहम्मद रफी ने अपनी जिंदगी में करीब 26 हजार गीत गाये और लगभग हर भाषा में। वर्ष 1946 में फिल्म 'अनमोल घड़ी' में 'तेरा खिलौना टूटा' से हिन्दी सिनेमा की दुनिया में कदम रखा। उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। वैसे तो मोहम्मद रफी के ज्यादातर गाने सुपरहिट रहे, लेकिन उनके गाए कुछ नगमें आज भी दिल की धड़कनों को बढ़ा देते हैं। ये गाने हैं आज मौसम बड़ा बेईमान है, तारीफ करूं क्या उसकी, चाहूंगा मैं तुझे, अभी ना जाओ छोड़कर।
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मोहम्मद रफी
साल 1948 में मोहम्मद रफी ने राजेन्द्र कृष्णन द्वारा लिखा हुआ गीत 'सुन सुनो आए दुनिया वालों बापूजी की अमर कहानी' गाया था। यह गाना देखते ही देखने इतना बड़ा हिट हो गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने घर पर यह गाना गाने के लिए निमंत्रण दिया था। मोहम्मद रफी के निधन के दिन मुंबई में तेज बारिश हो रही थी। कहा जाता है कि निधन की अंतिम यात्रा की रिकॉर्डिंग को हिंदी फिल्म में इस्तेमाल भी किया गया है।