कई बार ऐसा होता है कि ट्रेन का टिकट बुक कराने के बाद भी किसी कारण से यात्रा करना नहीं हो पाता है। ऐसे में केवल दो ही विकल्प यात्रियों के पास बचते हैं। पहला, यात्री अपने टिकट को कैंसिल कर दे और दूसरा, कि वो किसी अपने खास परिचित को ट्रांसफर कर दे और उसे यात्रा करने दे।
खास रिश्तेदारों के अलावा इनको भी कर सकते हैं ट्रांसफर
अभी तक रेलवे का नियम था कि कंफर्म टिकट पर अगर यात्री खुद यात्रा नहीं करता है तो फिर वो अपने निकटम रिश्तेदार जैसे कि पिता, माता, भाई, बहन, बेटा-बेटी, पति या फिर पत्नी को उस टिकट पर यात्रा करने की अनुमति दे सकता है। हालांकि ऐसा करने के लिए यात्री को रेलवे के नियमों को मानना पड़ेगा और आरक्षण कार्यालय में यात्रा करने की तिथि के कम से कम 24 घंटे पहले जानकारी देनी होगी।
केवल एक बार मिलती है ऐसी अनुमति
रेलवे के नियमों के अनुसार केवल एक बार ही यात्री को टिकट ट्रांसफर कराने की अनुमति मिल सकती है। अगर ग्रुप में सफर कर रहे हैं तो केवल 10 फीसदी यात्रियों के टिकट पर ही कोई दूसरा व्यक्ति सफर कर सकता है।
सरकारी अधिकारी भी करा सकते है ट्रांसफर
अगर कोई सरकारी अधिकारी ड्यूटी पर किसी दूसरे स्थान पर यात्रा कर रहा है तो वो भी अपने दूसरे सहकर्मी को यात्रा करने की अनुमति दे सकता है। हालांकि इसके लिए रेलवे को 24 घंटे पहले सूचना देनी होगी। इसके अलावा एनसीसी के कैडेट भी ऐसा कर सकते हैं। इनके कमांडर को भी 24 घंटे पहले दूसरे कैडेटों का नाम रेलवे अधिकारियों को देना होगा।
इन लोगों को देनी होगी 48 घंटे पहले सूचना
शादी की पार्टी और स्कूल के ग्रुप को 48 घंटे पहले सूचना देकर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम टिकट को ट्रांसफर करा सकते है।