'हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम, वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती....'। कुछ ऐसी ही शायरियां और कविताएं ज्यादातर आपने किसी महफिल या फिर दोस्तों के बीच सुनी होंगी। अब आप सोच रहे होंगे कि आज हम खबरें छोड़कर आपको शायरियां क्यों सुना रहे हैं। दरअसल हम आपको शायरी नहीं सुना रहे, बल्कि यह बता रहे हैं कि पिछले कुछ सालों में बजट का अंदाज भी शायराना हो चला है। बजट का जिक्र आते ही घंटों तक चलने वाला उबाऊ भाषण और ढेर सारे आंकड़े ही नजर आते हैं। इस नीरसता को तोड़ने के लिए कई बार वित्त मंत्रियों ने शायरियों और कविताओं का सहारा लिया है। हालांकि बीते कई सालों के दौरान करीबन परंपरा बन चुकी इस कवायद को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नहीं दोहराया। चलिए आपको बताते हैं कि बजट पेश करते-करते कब-कब मंत्रियों का अंदाज शायराना हो चला...
Budget 2023: संसद भवन में इस बार बजट भाषण में नहीं लगा शायरियों का तड़का; पढ़ें इससे जुड़े कुछ अहम किस्से
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Wed, 01 Feb 2023 01:23 PM IST
सार
हर साल पेश होने वाले बजट में केंद्रीय वित्त मंत्रियों के भाषण आम जनता को समझने के लिहाज से काफी बोरिंग होते हैं, इसका कारण भाषण में प्रयोग होने वाली जटिल आर्थिक शब्दावली है, लेकिन हमारे तमाम दफा वित्त मंत्रियों ने अपने बजट भाषण को कविता और शेर-ओ-शायरी से रंगीन बनाने की भी कोशिश की है। आइए देखते हैं इस लिस्ट में कौन-कौन से मंत्री शुमार हैं...
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