Zero Shadow Day: खगोलीय दृष्टिकोण से देखें, तो 18 अगस्त का दिन बेहद अद्भुत है। भारत में आज बेहद अनोखी खगोलीय घटना देखने को मिली है। भारत के बेंगलुरु में जीरो शेडो डे के तौर पर मनाया गया। यहां पर दोपहर 12 से 1 बजे के बीच डेढ मिनट के लिए लोगों को अपनी परछाई नहीं नजर आई। यह स्थिति साल में दो बार बनती है जब हर चीज की परछाई गायब हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि कुछ समय के लिए सूरज की किरणें लंबवत पड़ती हैं, जिसकी वजह से कुछ पल के लिए किसी भी चीज की परछाई गायब हो जाती है।
Zero Shadow Day: भारत में कुछ पल के लिए नहीं दिखाई दी किसी की भी परछाई, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह
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कुछ पल के लिए इंसान समेत किसी भी वस्तु की परझाई नजर नहीं आती है। यह घटना दक्षिणी क्षेत्रों में ही देखी गई है। राजस्थान में ऐसा दृश्य यानी जीरो शेडो नहीं होता है, क्योंकि राजस्थान का लेटीट्यूड 27 है। बिलो 23 लेटीट्यूड वाले इलाकों में ही यह घटना दिखाई देती है।
हर दिन नहीं दिखता ऐसा नजारा
हर दिन किसी भी वस्तु की परछाई की लंबाई क्षितिज से सूर्य की ऊंचाई पर निर्भर होती है। दिन की शुरुआत में यह लंबी होती है और दिन चढ़ने के साथ ही परछाई छोटी होती जाती है। दोपहर में परछाई सबसे छोटी होती है, लेकिन हर दिन परछाई की लंबाई दोपहर के समय शून्य नहीं होती है। जिस प्रकार की घटना आज हुई है।
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साल में दो बार घटती है यह खगोलीय घटना
धरती की घूमने की धूरी के झुकाव की वजह से यह खगोलीय घटना घटती है। सूरज के परिक्रमा तल के लंबवत होने की जगह धरती उससे 23.5 डिग्री तक झुकी होती है। इसकी वजह से सूरज हर दिन आपके ऊपर नहीं आ पाता है, लेकिन साल में दो बार यह घटना घटती है।
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इससे पहले बेंगलुरु में 25 अप्रैल को ऐसा नजारा दिखाई दिया था। अप्रैल और अगस्त के महीने में इन दोनों दिन धरती पर कर्क और मकर रेखा के बीच के स्थान पर सूर्य की रोशनी बिल्कुल लंबवत पड़ती है।