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World Wildlife Day: लद्दाख में भेड़ियों को बचाने का अनोखा तरीका, जानिए कैसे किया जा रहा इनका संरक्षण

Wed, 02 Mar 2022 05:19 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Wed, 02 Mar 2022 05:19 PM IST
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World Wildlife Day: A new study describes the success of a community-based conservation of wolves in Ladakh
लद्दाख में भेड़ियों को बचाने का अनोखा तरीका - फोटो : Nature Conservation Foundation

कभी लद्दाख में लोग अपने पशुओं को बचाने के लिए भेड़ियों को मार देते थे। वहां पर लोग भेड़ियों को शांगदोंग (एक तरह पत्थरों का जाल) में फंसाते थे जिसमें उनकी मौत हो जाती थी। अब भेड़ियों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। इस खतरे को देखते हुए एक संस्था ने इनके संरक्षण के लिए अनोखी पहल की है। अब भेड़ियों को बचाने के लिए शांगदोंगों को स्तूप बनाया जा रहा है। भेड़ियों के संरक्षण की सफलता की कहानी फ्रंटियर, इंटरनेशनल इकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित की गई है। 



इस स्टडी में बताया गया है कि संस्था ने कैसे लद्दाख के लोगों का विश्वास जीता और उनकी समस्याओं के बारे में जाना। इसके बाद उनको लद्दाख के पारंपरिक शांगदोंग को धार्मिक स्तूपों में बदलने के लिए मनाया जिससे खतरे में पड़े भेड़ियों को बचाया जा सके। आइए जानते हैं कि यह संस्था भेड़ियों के संरक्षण के लिए क्या कर रही है?

World Wildlife Day: A new study describes the success of a community-based conservation of wolves in Ladakh
लद्दाख में भेड़ियों को बचाने का अनोखा तरीका - फोटो : Nature Conservation Foundation


इस स्टडी के प्रमुख लेखक और नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन के फील्ड मैनेजर करमा सोनम ने बताया कि हमने भेड़ियों के संरक्षण की शुरुआत करने से पहले लद्दाख की कई यात्राएं की और स्थानीय लोगों से बातचीत की। इसके अलावा हमने स्थानीय लोगों से एक दीर्घकालिक संबंध बनाया। इस बातचीत के बाद हमें समझने में मदद मिली कि स्थानीय लोगों की भेड़ियों को मारने के पीछे की वजह अपने पशुओं की रक्षा करना था। 

World Wildlife Day: A new study describes the success of a community-based conservation of wolves in Ladakh
लद्दाख में भेड़ियों को बचाने का अनोखा तरीका - फोटो : Nature Conservation Foundation

करमा सोनम ने आगे बताया कि हमने भेड़ियों के शिकार में शामिल समुदाय के सदस्यों को दंडित करने की भी कोई बात नहीं की। इसके अलावा न ही हमने शांगदोंग को नष्ट करने की कोशिश की जो उनकी सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इंटरनेशनल इकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित की गई स्टडी में इस अनोखे तरीके के बारे में विस्तार से बताया गया है। 

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World Wildlife Day: A new study describes the success of a community-based conservation of wolves in Ladakh
लद्दाख में भेड़ियों को बचाने का अनोखा तरीका - फोटो : Pixabay

करमा सोनम को बीते साल भेड़ियों के संरक्षण की खास कोशिश के लिए नेटवेस्ट अर्थ हीरो अवार्ड से सम्मानित किया गया था। हिमालयन भेड़ियों के संरक्षण की कोशिश पर एक लघु फिल्म भी बनाई गई है। लद्दाख में भेड़ियों के इन जाल का आंकलन करने के लिए एक सर्वेक्षण किया गया था जिसका नेतृत्व इस स्टडी के सह लेखक रिग्जिन दोरजे ने किया। यह सर्वेक्षण 6 ब्लॉकों में किया जिनमें से सिर्फ तीन में 100 के करीब शांगदोंग पाए गए।

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