सड़क पर सुरक्षित चलने के लिए यातायात के नियमों का पालन करना बहुत जरूरी होता है। इन नियमों में ट्रैफिक सिग्नल्स भी आते हैं, जिनके बारे में अधिकतर लोग जानते ही होंगे। फिर भी हम बता देते हैं कि ट्रैफिक सिग्नल में तीन रंगों की लाइट (लाल, पीला और हरा) लगी होती है, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि आखिर ट्रैफिक लाइट में इन्हीं रंगों का उपयोग क्यों किया जाता है, किसी और रंग का क्यों नहीं?
2 of 7
ट्रैफिक लाइट्स
- फोटो : Social media
पहले तो हम आपको इन तीन रंगों के ट्रैफिक लाइट्स का मतलब बता दें। लाल रंग की ट्रैफिक लाइट का मतलब होता है कि आप गाड़ी रोक दें। ट्रैफिक लाइट पीला होने पर आप आगे बढ़ने के लिए तैयार हो जाएं और हरा होते ही आप आगे बढ़ जाएं।
3 of 7
ट्रैफिक लाइट्स
- फोटो : Pixabay
आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में सबसे पहला ट्रैफिक लाइट 10 दिसंबर, 1868 को लंदन के ब्रिटिश हाउस ऑफ पार्लियामेंट के सामने लगाया गया था। इस लाइट को जेके नाईट नामक रेलवे इंजीनियर ने लगाया था। तब रात में ट्रैफिक लाइट दिखे, इसके लिए उसमें गैस भरा जाता था। हालांकि वो ज्यादा दिन तक नहीं चल पाते थे और गैस के कारण फूट जाते थे। खास बात ये है कि उस समय ट्रैफिक लाइट में सिर्फ दो रंगों का इस्तेमाल किया जाता था।
4 of 7
ट्रैफिक लाइट्स
- फोटो : Pexels.com
पहला सुरक्षित स्वत: बिजली ट्रैफिक लाइट संयुक्त राज्य अमेरिका में साल 1890 में लगाए गए थे। उसके बाद से ट्रैफक लाइट का उपयोग दुनिया के कोने-कोने में होने लगा।
5 of 7
ट्रैफिक लाइट
- फोटो : Social media
अब हम आपको बताते हैं कि ट्रैफिक सिग्नल में लाल, पीले और हरे रंग का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है। दरअसल, लाल रंग अन्य रंगों की अपेक्षा में बहुत ही गाढ़ा होता है। यह दूर से ही दिखने लगता है। लाल रंग का प्रयोग इस बात का भी संकेत देता है कि आगे खतरा है, आप रूक जाएं।