हमारे देश में जब किसी अपराधी को फांसी की सज़ा दी जाती है, तो उसे सूर्योदय से पहले फांसी पर लटकाया जाता है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि फांसी देने का यही समय क्यों चुना गया।
इसलिए अपराधी को सूर्योदय से पहले दी जाती है फांसी
कहा जाता है कि सूर्योदय के बाद एक नया दिन शुरु होता है। जेल में सुबह होते ही लोग नए दिन के काम काज में लग जाते हैं। ऐसे में फांसी की सज़ा सूर्योदय होने से पहले ही दे दी जाती है।
इसलिए अपराधी को सूर्योदय से पहले दी जाती है फांसी
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फांसी
- फोटो : 12160.info
फांसी से पहले जेल प्रशासन अपराधी से उसकी आखिरी ख्वाहिश पूछता है। लेकिन आप ये नही जानते होंगे कि कैदी की ख्वाहिश जेल मैन्युअल के तहत हो तभी पूरी की जाती है।
इसलिए अपराधी को सूर्योदय से पहले दी जाती है फांसी
फांसी देने से पहले जलाद कहता कि मुझे माफ कर दिया जाए... हिंदू भाईयों को राम-राम, मुस्लमान भाइयों को सलाम। हम क्या कर सकते हैं हम तो हुकुम के गुलाम।
इसलिए अपराधी को सूर्योदय से पहले दी जाती है फांसी
फांसी देने के बाद 10 मिनट तक अपराधी को लटके रहने दिया जाता है। इसके बाद डॉक्टरों की एक टीम ये चैक करती है कि उसकी मौत हुई या नहीं, मौत की पुष्टि होने के बाद ही अपराधी को नीचे उतारा जाता है।