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इस इलाके के हर घर की चौखट पर मौजूद है कुछ ऐसा, देखकर सहम जाते हैं लोग

Thu, 03 May 2018 08:00 AM IST
बीबीसी, हिंदी
बीबीसी, हिंदी Updated Thu, 03 May 2018 08:00 AM IST
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Garave buried in front of every house in this village of Kurnool in Andhra Pradesh
ayya konda village at karnool - फोटो : shyam mohan/bbc

इस गांव पहुंचते ही लोगों के जहन में एक सवाल कौंधने लगता है कि 'क्या वो किसी कब्रिस्तान में आ गए हैं जहां कई घर हैं, या उस गांव में जो क्रबिस्तान से अटा पड़ा है। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में अय्या कोंडा एक ऐसा गांव है, जहां हर घर के सामने एक कब्र है।

Garave buried in front of every house in this village of Kurnool in Andhra Pradesh
ayya konda village at karnool - फोटो : shyam mohan/BBC

अय्या कोंडा कुरनूल जिला मुख्यालय से 66 किलोमीटर दूर गोनेगंदल मंडल में एक पहाड़ी पर बसा है। मालादासरी समुदाय के कुल 150 परिवारों वाले इस गांव के लोग अपने सगे संबंधियों की मौत के बाद उनके शव को घर के सामने दफ़न करते हैं क्योंकि यहां कोई कब्रिस्तान नहीं है। इस गांव के हर घर के सामने एक या दो कब्र देखने को मिलती हैं। गांव की महिलाओं और बच्चों को अपनी दिनचर्या के लिए भी इन्हीं कब्रों से होकर गुजरना पड़ता है। महिलाएं इन्हें पार कर पानी लेने जाती हैं तो बच्चे इनके इर्दगिर्द खेलते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये कब्र उनके पूर्वजों की हैं जिनकी वो रोज पूजा करते हैं, प्रसाद चढ़ाते हैं और अपने रिवाजों का पालन करते हैं।

Garave buried in front of every house in this village of Kurnool in Andhra Pradesh
ayya konda village at karnool - फोटो : Shyam mohan/BBC

घर में पकाया जाने वाला खाना परिवार के सदस्य तब तक नहीं छूते जब तक उसे मृतकों की कब्र पर चढ़ाया नहीं जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं इन कब्रों की कहानी क्या है... इस रिवाज के बारे में गांव के सरपंच श्रीनिवासुलु ने बीबीसी से कहा, "आध्यात्मिक गुरु नल्ला रेड्डी और उनके शिष्य माला दशारी चिंतला मुनिस्वामी ने गांव के विकास में अपनी पूरी शक्ति और धन लगा दिया था। उनकी किए कामों का आभार मानते हुए ग्रामीणों ने यहां उनके सम्मान में एक मंदिर स्थापित किया और उनकी पूजा करने लगे। ठीक उसी तरह अपने परिवार के बड़ों के सम्मान में ग्रामीण घर के बाहर उनकी कब्र बनाते हैं।"

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Garave buried in front of every house in this village of Kurnool in Andhra Pradesh
ayya konda villager - फोटो : Shyam mohan/BBC

यह रिवाज केवल भोग लगाने और पूजा करने तक ही सीमित नहीं है बल्कि जब वो नए गैजेट्स भी खरीदते हैं तो पहले उसे इन कब्रों के सामने रखते हैं, इसके बाद ही उसका इस्तेमाल शुरू करते हैं। श्रीनिवासुलु ने बीबीसी से कहा कि गांव वालों के बीच अंधविश्वास की गहरी जड़ों को हटा पाना बहुत मुश्किल है और अब उन्होंने गांव के बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है क्योंकि वो ही भविष्य में बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि बच्चों में कुपोषण गांव की एक और चिंता है और आंगनबाड़ी केंद्र के लिए और पहाड़ी ढलानों पर घर बनाने के लिए ग्रामीणों को जमीन आबंटन के लिए सरकार से अनुरोध किया गया है।

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Garave buried in front of every house in this village of Kurnool in Andhra Pradesh
ayya konda villager

इस गांव में कुछ और भी प्रथाएं भी मौजूद हैं जैसे, यहां के लोग गांव के बाहर शादी नहीं करते और परंपरागत खाट पर भी नहीं सोते हैं। गांव वालों का मुख्य पेशा खेती है। यहां ये अनाज के अलावा प्याज, मूंगफली और मिर्च की भी खेती करते हैं। अय्या कोंडा को इस इलाके में खरगोशों की भारी आबादी के कारण पहले 'कुंडेलू पडा' (खरगोशों के लिए घर) के नाम से जाना जाता था। हालांकि बाद में इसका नाम अय्या कोंडा रखा गया। गांव वालों को अपने राशन, पेंशन या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पहाड़ी के नीचे गंजिहल्ली जाना पड़ता है। मंडल परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र (एमपीटीसी) के सदस्य ख्वाजा नवाब कहते हैं कि कब्रिस्तान के निर्माण के लिए अगर सरकार जमीन आबंटित कर दे तो यह अंधविश्वास को दूर करने में समाधान के रूप में काम कर सकता है।

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