भारत देश में कभी रहस्यमयी तालों की एक ऐसी दुनिया हुआ करती थी, जिन्हें खोलना अपने आप में एक चैलेंज था। ये ताले ऐसे थे कि इन्हें पांच तरीकों से खोला जा सकता था, पर हर किसी के बस का भी नहीं था।
मुंबई स्थित 'आई' म्यूजियम में सैकड़ों वर्ष पुराने महलों, किलों, कार्यालयों, घरों इत्यादि में इस्तेमाल होने वाले अनोखे रहस्यमयी तालों की शृंखला मौजूद है। इन तालों को खोलने की पांच कुंजियां होती थी और इन्हें खोलने का तरीका भी किसी राज से कम नहीं होता था। ये ताले अमूमन दक्षिण भारत में स्थित अलग-अलग रियासतों में राजाओं-महाराजाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाते थे।
इन तालों की निगरानी में राजा-महाराजा उन चीजों को रखते थे, जिनकी भनक दुश्मन या चोर को लग जाए तो रियासत का बड़ा नुकसान हो सकता था। जैसे= हथियार, गोला बारूद, गहने, दस्तावेज, रियासतों का संधियां इत्यादि महत्वपूर्ण राजशाही सामान। ये ताले केवल लोहे के ही नहीं, बल्कि अलग-अलग धातुओं के बनाए जाते थे।
खास बात ये है कि जितना महत्वपूर्ण सामान होता था, उतने ही साइज का और उतना ही रहस्यमयी ताला तैयार किया जाता था। उनके आकार भी तरह-तरह के होते थे कि देखने वाले भी हैरान रह जाएं। देखने में एक बारगी तो वे ताला ही प्रतीत नहीं होता था। ध्यान से पड़ताल करने पर मालूम चलता था कि यह चीज एक ताला है।
सबसे रोचक बात ये कि यह ताले विभिन्न जीव जंतुओं, फूलों, पक्षियों, बिच्छू और सब्जियों की शेप में होते थे। इन्हें तैयार करने के लिए भी कारीगर बेहद निपुण होते थे और इनके सांचे भी विशेष तौर पर बनाए जाते थे। बताया जाता है कि तालों की विश्वसनीयता की इतनी ज्यादा थी कि किलों और महलों के बाद संबंधित रियासतों में प्रजा भी इस तरह के छोटे आकार के तालों को अपने घरों में इस्तेमाल करने लगे थे।