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देशभर में अक्षय तृतीया को मानते हैं बेहद खास, वहीं इन 18 गांवों में इस दिन मनाया जाता है शोक

Wed, 18 Apr 2018 10:15 AM IST
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 18 Apr 2018 10:15 AM IST
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akshay tritiya for these 18 villages of Rajasthan this day is inauspicious
akshay tritiya rajasthan
18 अप्रैल, बुधवार को बैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को अक्षय तृतीया का पर्व है। यह तिथि बहुत शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन जो भी काम किया जाए उसका कई गुना फल मिलता है। इस दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है, इसमें किसी भी तरह का कोई मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है। एक और देशभर में से धूमधाम से मनाया जाता है, वहीं राजस्थान के 18 गांव एेसे भी हैं, जिनमें बिलकुल उल्टा होता है। इन गांवों में इस दिन शादी के बजाय शोक मनाया जाता है।
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राजस्थान के बरवाड़ा, शिवाड़, बलरिया, एकड़ा, हस्तगंज, बासड़ा सहित आसपास के 18 गांवों में अक्षय तृतीया के अवसर पर कोई मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। पूरे देश में इस दिन को शुभ मानकर विवाह समारोह आयोजित किए जाते हैं, वहीं इन गांवों में सन्नाटा पसरा रहता है। 
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इन गावों में इस कदर इस दिन को अशुभ माना जाता है कि अगर यदि इस दिन किसी की शादी तय भी होती है तो बारात इससे एक दिन पहले आती है और अगले दिन जाती है। यानी दुल्हन की विदाई भी अक्षय तृतीया को नहीं की जाती। इसके पीछे चौथ माता की आंट (कसम) वजह है।
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लोक मान्यता के अनुसार, चौथ का बरवाड़ा में महाराज फतेह सिंह राजा का शासन था। इस दौरान राजा विद्रमा की बरात यहां बस्ती में आई थी। विद्रमा का शत्रु राजा ने इसका फायदा उठाया और हमला कर दिया।
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राजा लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हुए। इस दिन सोमवार और आखातीज का पर्व था। इस घटना के बाद बरवाड़ा क्षेत्र में शोक की लहर छा गई। तब फतेह सिंह सम्पूर्ण बरवाड़ा सहित एवं बरवाड़ा क्षेत्र के अधीन 18 गांवों में अक्षया तृतीया को विवाह नहीं करने की कसम दिलाई। इस दिन तेल की कढ़ाई भी नहीं चढ़ाई जाती। बता दें, यह घटना करीब 800 साल पहले हुई थी।
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