अमेरिका के मिशिगन में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने इमरजेंसी सर्विस पर मदद के लिए एक-दो बार नहीं बल्कि 13 बार से ज्यादा बार फोन किया लेकिन किसी ने उसकी कॉल रिसीव नहीं की, जिससे उसके पति की मौत हो गई। इसके बाद महिला ने बड़ा कदम उठाते हुए कुछ ऐसा काम किया है, जिसे इमरजेंसी सर्विस वाले शायद कभी नहीं भूल पाएंगे।
दरअसल, मिशगन की रहने वाली डोरोशी ग्रीन का कहना है कि पिछले साल मार्च में उनके पति स्टीफन ग्रीन को हार्ट अटैक आया। मौके पर मौजूद उनके कर्मचारियों ने इमरजेंसी सर्विस पर 13 बार कॉल किया, लेकिन किसी ने रिसीव नहीं किया। इससे स्टीफन की मौत हो गई। अब डोरोथी ने कोर्ट में इस देरी को जीवन और मौत के बीच का अंतर बताते हुए लापरवाही का आरोप लगाया है।
इमरजेंसी सर्विस 8 मिनट लेट हुई थी
मिशिगन के सुरक्षा विभाग ने जांच के बाद बताया कि इमरजेंसी सर्विस में काम कर रहे एक डिस्पैचर ने 911 नंबर का स्पीकर बंद कर दिया था। लिहाजा, किसी को फोन की आवाज सुनाई नहीं दी और इमरजेंसी सेवाएं करीब आठ मिनट लेट हो गईं।
डोरोशी ग्रीन ने घटना को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए इमरजेंसी सर्विस में देरी के लिए 178 करोड़ रुपए का दावा ठोका है। ग्रीन परिवार ने अपनी याचिका में कहा है कि यही समय किसी को जिंदा रखने में फर्क बन सकता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 911 के दो ऑपरेटरों ने जानबूझकर फोन बंद कर दिए थे। दोनों को लापरवाही, जानबूझकर परेशानी पैदा करने और गलत तरीके से हुई मौत का जिम्मेदार बताया गया है।
इमरजेंसी सेवाओं से पीड़ितों की जानकारी जुटाएंगे
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US Michigan family
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ग्रीन के वकील जोनाथन मार्को ने डॉक्टरों के हवाले से बताया कि अगर इमरजेंसी सर्विस में उनकी शुरुआती कॉल उठा ली जाती तो स्टीफन की जान बच सकती थी। मार्को अब यह जानने की कोशिश में जुटे हैं कि इमरजेंसी सर्विस की लापरवाही की वजह से उस दौरान पूरे शहर में कितने लोगों को परेशानी हुई।