भारतीय मूल की कमला हैरिस कुछ ही दिनों में अमेरिका की नई उप-राष्ट्रपति बन जाएंगी। अमेरिका के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब कोई महिला राजनैतिक तौर पर इतनी ऊंचाई पर पहुंच पाई है। हालांकि, इसको लेकर पहले भी सवाल होते रहे हैं कि सुपर पावर देश में आखिर कोई महिला राष्ट्रपति क्यों नहीं चुनी गई? आपको बता दें कि अमेरिका में इसके पीछे एक खास तरह का मनोविज्ञान काम करता है।
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कमला हैरिस
- फोटो : अमर उजाला
सैन्य ताकत से लेकर तकनीक में काफी आधुनिक माने जाने वाले अमेरिका में शीर्ष पद के लिए महिलाओं को कमजोर मानने की मानसिकता बहुत पहले से है। अगर अमेरिका में हुए पिछले राष्ट्रपति चुनाव की बात करें, तो ट्रंप के विपक्ष में हिलेरी क्लिंटन ऐसी पहली महिला थीं, जिसने सीधे राष्ट्रपति के लिए दावेदारी की। लेकिन क्लिंटन के हार के बाद बहुत लोगों ने ये माना कि महिला होने के कारण वे चुनाव हार गईं। क्लिंटन ने भी एक इंटरव्यू में यह कहा था कि यहां हर औरत के पीछे एक डबल स्टैंडर्ड चलता है, जो उसे पीछे रखता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
साल 1960 के बाद से अबतक लगभग 57 देशों को महिला नेताओं ने लीड किया। इन आंकड़ों को स्टेटिस्टा ने जारी किया है। इसी साल से पहले 15 महिलाएं अलग-अलग यूएन देशों में लीड पर थीं, लेकिन अब उनकी संख्या 13 पर जा चुकी है।
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वहीं दूसरी ओर जापान, रूस, चीन, इटली और सऊदी अरब ऐसे देशों की सुची में हैं, जहां कभी कोई महिला शीर्ष राजनैतिक पद पर नहीं बैठी। बता दें कि अब तक अमेरिका भी इन्हीं देशों में से एक रहा, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि कमला हैरिस के उप-राष्ट्रपति बनने पर ये हालात बदल जाएंगे।
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फ्रांस, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका में अब तक एक-एक महिला लीडर आई, लेकिन सभी लोग कुछ ही समय के भीतर सत्ता छोड़ दी। ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, साउथ कोरिया, तुर्की और इंडोनेशिया जैसे देश तब भी बेहतर हाल में हैं, जहां एक महिला राजनेता आ चुकी है और 3 से 5 सालों तक सत्ता में रही।