Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच भीषण युद्ध जारी है। इस युद्ध के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। अब पुतिन से जुड़ी एक खबर की चर्चा तेज हो गई है। बीते कुछ सालों में जिन लोगों ने व्लादिमीर पुतिन और उनकी नीतियों का विरोध किया उनकी संदिग्ध मौत हो गई। लेकिन इन लोगों की मौत कैस हुई और किसने हत्या की? यह आज भी रहस्य है। बीते दिनों रूस के निर्वासित पूर्व सांसद डेनिस वोरोनेन्कोव की हत्या कर दी गई।
Russia Ukraine War: पुतिन का इन 10 लोगों ने किया था विरोध, आज भी इनकी मौत है रहस्य
यूरी सेकिवोचिन
यूरी सेकिवोचिन एक खोजी पत्रकार और लेखक थे और रसियन अखबार नोवाया गजेटा के लिए लिखते थे। उन्होंने अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ कई खबरें लिखी थीं। सोवियत संघ में हुए भ्रष्टाचार को साल 1988 में सेकिवोचिन ने अखबार में लेख लिखकर सबके सामने लाया था। साल 1988 में फिलाडेल्फिया के एक घर में धमाका हुआ था। इस धमाके पर उन्होंने अखबार में लिखा था। इसके अलावा वह 1999 में एक अपार्टमेंट में ब्लास्ट की जांच कर रहे थे। 2003 में संदिग्ध बीमारी की वजह से उनकी मौत हो गई जो आज भी रहस्य है।
एलेक्जेंडर लिटविनिन्को (Alexander Litvinenko)
रूस के कई अहम राज को जानने वाले केजीबी के पूर्व एजेंट एलेक्जेंडर लिटविनिन्को की हत्या कर दी गई थी जिसका आरोप राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर लगता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लिटविनिन्को को रेडियोऐक्टिव जहर पोलोनियम-210 चाय में मिलाकर दे दिया गया था। साल 2002 में वह अपनी पत्नी और बेटे के साथ रूस से ब्रिटेन भाग गए थे। उन्होंने वहां की नागरिकता ले ली थी, लेकिन इसके कुछ दिनों बाद ही उनकी मौत हो गई थी।
सर्गेई यूसेनकोव (Sergei Yushenkov)
सर्गेई यूसेनकोव रूसी सेना में कर्नल थे। वह उदारवाद के पक्षदर थे जिसके लिए उन्होंने पार्टी बनाई थी। मास्को में वह उदारवाद के समर्थन में आंदोलन करने जा रहे थे। इसी दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। सर्गेई यूसेनकोव ने आरोप लगाया था कि पुतिन सरकार ने साल 1999 में एक अपार्टमेंट में ब्लास्ट करवाया था। उन्होंने पुतिन सरकार को बेनकाब करने के लिए घटना के सबूत जुटाने की बात कही थी।
आन्ना पोलितकोव्स्कावा (anna politkovskaya)
आन्ना पोलितकोव्स्कावा एक पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। वह चेचन्या में मानवाधिकारों के हनन को लेकर अखबार नोवाया गजेटा में लिखती थीं। अखबार के उपप्रधान संपादक और अन्य लोगों का मानना है कि इसके चलते पोलितकोव्स्कावा की सरकारी मिलीभगत से हत्या कर दी गई। 7अक्तूबर 2006 को उनके फ्लैट के सामने ही गोली मार दी गई थी।