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Science News: अंतरिक्ष में मिला अनोखा ग्रह, बृहस्पति से चार गुना है बड़ा, देखकर वैज्ञानिक भी हैरान
Thu, 18 Jul 2024 07:13 PM IST
धर्मेंद्र सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र सिंह
Updated Thu, 18 Jul 2024 07:13 PM IST
सार
ग्रह पृथ्वी से करीब 1100 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है, जहां एक तारे का चक्कर लगा रहा है। यह तारा एक बाइनरी युग्म में से एक है, जिसकी वजह से ग्रह प्राथमिक तारे का चक्कर लगाता है, तो वहीं प्राथमिक तारा दूसरे तारे का चक्कर लगाता है।
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अंतरिक्ष में मिला अनोखा ग्रह, बृहस्पति से चार गुना है बड़ा
- फोटो : Istock
विस्तार
Science News: वैज्ञानिकों ने एक अनोखे ग्रह की खोज की है। यह अपने सूर्य की परिक्रमा अंडाकार तरीके से कर रहा है। इसके कारण यह कभी अपने तारे के पास होता है, कभी बहुत दूर होता है। इसकी वजह से इस ग्रह का तापमान कभी बहुत ठंडा होता है, कभी बेहद गर्म होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यहां एक अलग दुनिया दिखाई दे सकती है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस ग्रह का नाम TIC 241249530 b है।
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यह ग्रह पृथ्वी से करीब 1100 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है, जहां एक तारे का चक्कर लगा रहा है। यह तारा एक बाइनरी युग्म में से एक है, जिसकी वजह से ग्रह प्राथमिक तारे का चक्कर लगाता है, तो वहीं प्राथमिक तारा दूसरे तारे का चक्कर लगाता है। बुधवार को नेचर जर्नल में एक अध्ययन प्रकाशित किया गया है। इसमें शोधकर्ताओं की तरफ से बताया गया है कि कि दो सितारों से संबंध होने की वजह से यह ग्रह 'गर्म बृहस्पति' बन सकता है। वैज्ञानिकों ने अभी तक 5000 से अधिक ग्रहों ( एक्सोप्लैनेट) की खोज की है। इनमें से 300 से 500 गर्म बृहस्पति हैं।
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जानिए क्यों कहा जाता है बृहस्पति?
बृहस्पति जैसा विशाल गैसीय पिंड होने की वजह से इन ग्रहों को गर्म बृहस्पति कहा जाता है। यह अपने सितारों की बेहद नजदीक से परिक्रमा करते हैं, जिससे झुलसाने वाले तापमान तक गर्म होता है। हमारे सौर मंडल के बृहस्पति ग्रह को सूर्य की चारों तरफ एक परिक्रमा करने में पृथ्वी के 4000 दिन लगते हैं। जबकि गर्म बृहस्पति सिर्फ कुछ दिनों में अपने सितारे की एक कक्षा पूरा कर लेता है।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक, बड़े ग्रह दूर से अपने तारे की परिक्रमा की शुरुआत करते हैं, लेकिन समय के साथ पास आ जाते हैं। वैज्ञानिकों का सवाल है कि आखिर इतने विशाल ग्रह अपने सितारे के करीब कैसे आते हैं, जो बुध और हमारे सूर्य के बीच की दूरी से भी कम है।
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नासा की एक्सोप्लैनेट खोजने वाली सैटेलाइट TESS ने 12 जनवरी 2020 को डेटा जुटाया। इससे पता चला कि मेजबान तारे TIC 241249530 के सामने से कुछ गया था। TESS तारों की रोशनी में गिरावट को पता करता है। इससे एक्सोप्लैनेट की उपस्थिति का संकेत मिलता है। शोधकर्ताओं को जानकारी मिली है कि यह बृहस्पति से करीब पांच गुना ज्यादा विशाल है।