Science News: यूरोपा बृहस्पति ग्रह के सबसे बड़े चद्रमाओं में शामिल है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने यूरोपा को लेकर बड़ा खुलासा किया है। वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि इस उपग्रह पर धरती की तरह जीवन हो सकता है। इसकी मुख्य वजह यूरोपा के सतह पर पानी और ऑक्सीजन की उपस्थिति को माना गया था। अब जानकारी सामने आई है कि जीवन को बनाकर रखने के लिए यूरोपा पर पर्याप्त ऑक्सीजन का उत्पादन नहीं होता है।
Science News: बृहस्पति के चंद्रमा पर मौजूद है जीवन? नासा के अंतरिक्ष यान ने किया चौंकाने वाला खुलासा
ऑक्सीजन पर हुआ बड़ा खुलासा
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में जेमी सजाले और उनकी शोध टीम का निष्कर्ष है कि चंद्रमा की सतह से प्रचुर मात्रा में हाइड्रोजन निकलती है, लेकिन यह प्रति सेकंड सिर्फ 18 किलोग्राम ऑक्सीजन पैदा करती है। यह बीते कंप्यूटर मॉडल द्वारा अनुमानित करीब एक हजार प्रति सेकेंड से काफी कम है।
फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के खगोल विज्ञानी मनस्वी लिंगम ने बताया कि इस कमी के बावजूग, हाल के ऑक्सीजन अनुमान अभी भी जीवन के लिए सूक्ष्मजीवियों की आदत के अनुकूल हैं, जैसा कि हमें पता है।
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यूरोपा की सतह के नीचे है पानी
बृहस्पति ग्रह के चंद्रमा यूरोपा की सतह के नीचे पानी का बड़ा स्रोत दबा है। इस पानी का सतह पर किसी इस्तेमाल में नहीं आता है। दूसरी बात सूर्य के प्रकाश की अनुपस्थिति की वजह सतह पर कोई पौधा प्रकाश संश्लेषण भी नहीं कर सकता, लेकिन सैकड़ों लाखों सालों में महासागरों की बर्फ से ढकी छतों पर जमा पोषक तत्वों को कई भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं द्वारा नीचे ज्यादा गहराई तक पहुंचाया जा सकता है।
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यूरोपा पर भारी मात्रा में हाइड्रोजन
यूरोपा के वायुमंडल में हाइड्रोजन की मोटी परत है, जिसके नीचे सतह पर ऑक्सीजन की एक नाजुक परत है। हाइड्रोजन और ऑक्सीजन लगातार चंद्रमा की पतली हवा की भरपाई करने का काम करते हैं, क्योंकि इसके विकिरण से भरे बर्फीले आवरण से बाहर आते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह तत्व कभी-कभी उछल कर बाहर आ जाते हैं।