ओडिशा के संबलपुर जिले के रहने वाले संदीप खंडेलवाल ने सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट पुणे से एमबीए किया। पढ़ाई पूरी होते ही उन्होंने मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करना शुरू कर दिया। बेंगलुरु और पुणे में लगभग आठ साल तक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम किया। कॉर्पोरेट सेक्टर में ऊंचाई को छूने वाले लोगों में किसी के पास ऐसा साहस कम ही होता है, जो गांव वापस आ सके। लेकिन संदीप ने 16 लाख रुपये की नौकरी छोड़कर गांव में आकर खेती करना शुरू कर दिया।
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संदीप खंडेलवाल
- फोटो : सोशल मीडिया
नौकरी करते समय संदीप को ऐसा महसूस हो रहा था कि वह जो भी कर रहे हैं सब अपने लिए कर रहे हैं, दूसरों के लिए वह कुछ भी नहीं कर रहे हैं। इसी बीच उन्हें अपने गांव और समुदाय के लिए कुछ करने का विचार आया। संदीप अपने गांव में कुछ ऐसा करना चाहते थे कि, जिससे लोगों की जिंदगी बेहतर हो सके। काफी सोच-विचार के बाद संदीप ने तय किया कि वो गांव जाकर व्यवसायिक तरीके से खेती करना शुरू करेंगे, जिससे गांव के लोगों को रोजगार मिल सके।
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ऑर्गेनिक खेती
- फोटो : सोशल मीडिया
साल 2014 में वो अपने गांव लौट आए और ऑर्गेनिक खेती करना शुरू कर दिए। शुरुआत में संदीप के घरवालें उनके इस फैसले से बिल्कुल खुश नहीं थे। शुरुआती दो से ढाई साल का समय सिर्फ खेत को जैविक तरीकों से तैयार करने और किसानी सीखने में ही लग गया। संदीप इसके लिए कई जगहों पर जाकर ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए ट्रेनिंग लिए। लगभग ढाई साल के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी खेती बढ़ाने लगे।
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संदीप खंडेलवाल
- फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि संदीप सात से आठ एकड़ में जैविक तरीकों से धान उगाते हैं और इसके साथ ही वो सब्जी और फूल की भी खेती कर रहे हैं। वहीं दो एकड़ में मिर्ची की फसल से साल में लगभग 500 क्विंटल हरी मिर्च उपजा लेते हैं। संदीप ने अपने फार्म में करीब 20 लोगों को काम पर रखा हुआ है। ये सभी लोग परमानेंट स्टाफ हैं। इस जैविक खेती से संदीप को साल में 25 लाख रुपये की कमाई होती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
खेती और लोगों को रोजगार देने के साथ ही संदीप ने अपने गांव में बच्चों की शिक्षा के लिए Eduventive नाम से एक पहल भी शुरू की है। इसके जरिए उनका उद्येश्य बच्चों को आकदमिक शिक्षा या सांस्कृतिक कला में अव्वल बनाने में सहायता पहुंचाना है। संदीप खंडेलवाल की ये कहानी काफी प्रेरणादाय है।