अधिक वजन को कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़कर देखा जाता रहा है, पर क्या इसका कमाई और नौकरी पर भी असर हो सकता है? सवाल निश्चित ही हैरत भरा हो सकता है, पर हकीकत कुछ ऐसा ही बयां करती है। द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक लंदन जैसे शहरों में ओबेसिटी-पे गैप देखा जा रहा है। जिसका मतलब है कि जिन लोगों का वजन अधिक है वह पतले-कम वजन वाले सहकर्मियों की तुलना में कम कमा और बचा पा रहे हैं।
Obesity & Income: मोटापाग्रस्त लोगों को कमाई कम, नौकरियों-वेतन में भेदभाव भी, जानिए क्या है इसकी वजह?
वर्कप्लेस पर होता है भेदभाव
रिपोर्ट से पता चलता है कि ब्रिटेन में करीब 70 फीसदी कर्मचारियों का मानना है कि वर्कप्लेस पर इस मामले में उनके साथ भेदभाव होता आ रहा है। अब तक की रिपोर्ट में माना जाता रहा था कि इस तरह की समस्याओं की शिकार सिर्फ महिलाएं होती हैं पर इस रिपोर्ट में देखा जा रहा है कि पुरुष आबादी भी बड़ी संख्या में इसका शिकार है।
मोटापाग्रस्त लोगों की आय कम
अध्ययन की रिपोर्ट में पाया गया है कि महिला हों या पुरुष दोनों ही मोटापे के कारण न सिर्फ स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर परेशान रहती हैं साथ ही इसका असर आर्थिक सामंजस्य पर भी देखा जा रहा है। 25-54 साल की आयु वाले 1.13 लाख से अधिक लोगों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि इस आयुवर्ग के मोटापा ग्रस्त पुरुष अपने समकक्षों की तुलना में कम कमा पा रहे हैं।
क्या हो सकता है इसका कारण
रिपोर्ट का मानना है कि सामान्य वजन वालों की तुलना में मोटापे के शिकार लोगों का सालाना खर्च अधिक होता है। इतना ही नहीं अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि नियोक्ताओं का ऐसा लगता है कि मोटापे के कारण होने वाले स्वास्थ्य समस्याओं के चलते ऐसे लोग ठीक तरह से काम नहीं कर पाएंगे, उन्हें बीमारियों के चलते अधिक छुट्टी की जरूरत हो सकती है, जिसके कारण नौकरियों और आय पर भी इसका असर देखा जा रहा है।
हालांकि इस बारे में सुधार को लेकर अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को और वाशिंगटन में शारीरिक बनावट के आधार पर हो रही भेदभाव पर बैन लगाया जा चुका है।
स्रोत और संदर्भ
obesity pay gap is worse than previously thought