सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। हिंदू धर्म में इस महीने को सबसे ज्यादा पवित्र माना जाता है। इस महीने में शिवभक्त भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन सोमवार का व्रत करते हैं। इसके साथ ही कांवड़ में गंगाजल भरकर सैंकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं और इसी जल से भोले बाबा का अभिषेक करते हैं।
कैलाश पर्वत का भी हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। क्योंकि इस पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। कैलाश पर्वत से जुड़ी सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को अब तक हजारों लोगों ने फतह कर लिया है, लेकिन कैलाश पर्वत पर आज तक कोई नहीं चढ़ पाया है। जबकि कैलाश पर्वत की ऊंचाई माउंट एवरेस्ट से लगभग 2000 मीटर कम है। कैलाश पर्वत पर किसी का नहीं पहुंचना अब तक रहस्य ही बना हुआ है।
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कैलाश पर्वत
- फोटो : सोशल मीडिया
कैलाश पर्वत पर किसी के नहीं चढ़ पाने के पीछे कई तरह की कहानियां प्रचलित हैं। कुछ लोगों का ये मानना है कि भगवान शिव कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं। इसलिए कोई भी जीवित इंसान वहां तक नहीं पहुंच सकता है। मान्यताओं के अनुसार, जिसने कभी कोई पाप न किया हो मरने के बाद केवल वही कैलाश पर्वत को फतह कर सकता है।
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कैलाश पर्वत
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ऐसा भी माना जाता है कि कैलाश पर्वत पर थोड़ा सा ऊपर चढ़ते ही व्यक्ति दिशाहीन हो जाता है। चूंकि बिना दिशा के चढ़ाई करना मतलब मौत को दावत देना है, इसीलिए कोई भी इंसान आज तक कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाया।
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कैलाश पर्वत
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण के मुताबिक इस पर्वत का स्लोप (कोण) 65 डिग्री से भी ज्यादा है। जबकि माउंट एवरेस्ट में यह 40-60 तक है, जो इसकी चढ़ाई को और मुश्किल बनाता है। ये भी एक वजह है कि पर्वतारोही एवरेस्ट पर तो चढ़ जाते हैं, लेकिन कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाते हैं।
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कैलाश पर्वत
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कैलाश पर्वत पर चढ़ने की आखिरी कोशिश लगभग 18 साल पहले यानी साल 2001 में की गई थी। उस समय चीन ने स्पेन की एक टीम को कैलाश पर्वत पर चढ़ने की अनुमति दी थी। हालांकि, कैलाश पर्वत की चढ़ाई पर फिलहाल पूरी तरह से रोक लगी हुई है। क्योंकि भारत और तिब्बत समेत दुनियाभर के लोगों का मानना है कि यह पर्वत एक पवित्र स्थान है, इसलिए इस पर किसी को भी चढ़ाई नहीं करने देना चाहिए।