महाभारत और उससे जुड़े प्रमुख पात्रों यानी पांचों पांडवों को आप जरूर जानते होंगे। युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव, ये पांचों भाई बेहद ही शक्तिशाली थे। उनका मुकाबला करना मतलब मौत को दावत देने के समान था। ऐसा कहा जाता है कि भीम के अंदर 10 हजार हाथियों का बल था। क्या आपने कभी ये बात सोचा है कि एक साधारण मनुष्य की तरह दिखने वाले भीम के अंदर इतनी शक्ति कैसे आई? आज हम आपको इस गहरे रहस्य के बारे में बताएंगे।
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महाभारत भीम
- फोटो : सोशल मीडिया
प्रचलित मान्यताओं के अनुसार भीम बचपन से ही काफी शक्तिशाली थे। वह दौड़ने में, निशाना लगाने या कुश्ती लड़ने, सभी खेलों में धृतराष्ट्र के पुत्रों यानी कौरवों को हरा देते थे। हालांकि, उनके अंदर कौरवों के प्रति कोई द्वेष नहीं था। लेकिन दुर्योधन के मन में भीम के प्रति जलन शुरू से ही थी। ऐसे में दुर्योधन ने उचित अवसर मिलते ही भीम को मारने का विचार किया।
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दुर्योधन ने एक बार खेलने के लिए गंगा तट पर शिविर लगवाया और उस स्थान का नाम रखा उदकक्रीडन। वहां खाने-पीने से लेकर खेलने-कूदने तक सभी व्यवस्था की गई थी। दुर्योधन ने पांचों पांडवों को भी वहां खेलने के लिए बुलाया और एक दिन मौका पाकर उसने भीम के खाने में जहर मिला दिया। जब भीम ये विषभरा खाना खाकर बेहोश हो गए, तब दुर्योधन ने दु:शासन के साथ मिलकर उन्हें गंगा में फेंक दिया।
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भीम मूर्छित अवस्था में ही पानी के रास्ते नागलोक पहुंच गए। वहां सांपों ने उन्हें खूब डंसा, जिसके प्रभाव से उनके शरीर से विष का असर कम हो गया। इसके बाद जब भीम को होश आया, तो वो आसपास भयंकर सांपों को देखकर उन्हें मारने लगे। भीम से डरकर सभी सांप नागराज वासुकि के पास गए और उन्हें पूरी बात बताई।
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इस बात की जानकारी मिलते ही नागराज वासुकि आर्यक नाग के साथ खुद भीम के पास गए। वहां जाते ही आर्यक नाग ने भीम को पहचान लिया। दरअसल, आर्यक नाग भीम के नाना के नाना थे। इसके बाद वो भीम को अपने साथ नागलोक ले गए। वहां उन्होंने नागराज वासुकि से भीम को उन कुण्डों का रस पिलाने की आज्ञा मांगी, जिसमें हजारों हाथियों का बल था। बाद में नागराज वासुकि ने इसकी आज्ञा दे दी और तब भीम 8 कुण्डों का रस पीकर एक दिव्य शय्या पर सो गए।