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कहानी एक खतरनाक वैज्ञानिक प्रयोग की: जहां लोग खाने लगे थे एक-दूसरे का मांस

Tue, 09 Mar 2021 09:11 AM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Tue, 09 Mar 2021 09:11 AM IST
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most dangerous experiment in the world know about russian sleep experiment
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

दुनियाभर में तमाम तरह के एक्सपेरिमेंट (प्रयोग) होते रहते हैं। हालांकि, इनमें से कुछ के बारे में लोगों का पता होता है, जबकि कुछ गुप्त रूप से ही किए जाते हैं। कुछ इसी तरह का ही एक एक्सपेरिमेंट 1940 के दशक में किया गया था, जिसके बारे में जानकर लोगों की रूह कांप जाती है। इस एक्सपेरिमेंट को 'रशियन स्लीप एक्सपेरिमेंट' के नाम से जाना जाता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

आपको बता दें कि इस एक्सपेरिमेंट के लिए जेल में बंद पांच कैदियों के साथ एक डील की गई और उनसे कहा गया कि अगर वो इसका हिस्सा बनते हैं, तो एक्सपेरिमेंट खत्म होने के तुरंत बाद उन्हें छोड़ दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें बताया गया कि 30 दिन तक उन्हें बिना सोए रहना होगा, जिसके लिए कैदी राजी हो गए। इसके बाद उन्हें एक एयर टाइट चैंबर में बंद कर दिया गया और उसमें एक गैस डाल दी गई, जिससे कैदियों को नींद न आए और वैज्ञानिक यह देख सकें कि इसका उनपर क्या प्रभाव पड़ता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

शुरुआत में तो सबकुछ ठीक था। सारे कैदी आराम से एक दूसरे से बातें करते रहते थे। उनकी बातों को वैज्ञानिक रिकॉर्ड भी करते रहते थे और साथ ही एक कांच के जरिए उनपर नजर भी बनाए हुए थे। करीब एक हफ्ते तक तो सारे कैदियों की हालत ठीक थी, लेकिन उसके बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कैदियों ने धीरे-धीरे एक दूसरे से बात करना बंद कर दिया। वो बैठे-बैठे अपने आप ही कुछ-कुछ बोलते रहते थे। ऐसे ही 10 दिन बीत गए। फिर जैसे ही 11वां दिन आया, एक कैदी अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगा। वह इतनी तेज-तेज चिल्ला रहा था कि कहते हैं कि उसकी वोकल कॉर्ड फट गई थी। इसमें सबसे चौंकाने वाली बात ये थी कि उसके चिल्लाने का बाकी कैदियों पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ा।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कैदियों की हालत देखकर वैज्ञानिकों ने इस एक्सपेरिमेंट को रोकने का फैसला किया। उन्होंने 15वें दिन कैदियों वाले चैंबर में वो गैस नहीं डाली, जिसकी मदद से कैदियों को सोने से रोका जाता था। लेकिन इसका उल्टा ही प्रभाव पड़ा। सारे कैदी अचानक से चिल्लाने लगे और कहने लगे कि हमें बाहर मत निकालो, हम बाहर नहीं आना चाहते। इस बीच चैंबर में ही एक कैदी की मौत भी हो गई।

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