गुजरात सल्तनत के शक्तिशाली शासकों में से एक महमूद बेगड़ा अपने भारी-भरकम खुराक के लिए काफी मशहूर थे। इस शासक के खाने का जिक्र इटली और पुर्तगाल के सैलानियों ने भी किया था। वैसे आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि जो पहलवान होते हैं, वो ज्यादा खाना खाते हैं, लेकिन महमूद बेगड़ा एक दिन में 35 किलो खाना खाते थे। महमूद बेगड़ा इतना ज्यादा खाना बहुत आराम से खा जाते थे और उसे पचा भी लेते थे। लेकिन सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि यह बादशाह रोजाना जहर का भी स्वाद लेता था।
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एक दिन में 35 किलो खाना खाते थे महमूद बेगड़ा
- फोटो : सोशल मीडिया
महमूद बेगड़ा महज 13 साल की उम्र में ही गद्दी पर बैठे थे और 52 साल तक सफलतापूर्वक गुजरात पर राज किया था। उन्हें अपने वंश का सबसे प्रतापी शासक माना जाता था। महमूद बेगड़ा की मूंछे काफी बड़ी-बड़ी थी। पुर्तगाली सैलानी उनकी मूंछों के बारे में कहा करते कि वे इतनी लंबी और रेशमी थीं कि वे उसे साफे की तरह अपने सिर पर बांध लिया करते थे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
महमूद बेगड़ा का नाम महमूद शाह प्रथम था। उन्हें 'बेगड़ा' की उपाधि तब दी गई थी, जब उन्होंने 'गिरनार' जूनागढ़ और चम्पानेर के किलों को जीत लिया था। कहते हैं कि गिरनार किले पर बेगड़ा का अधिकार हो जाने के बाद यहां के राजा ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद उसकी सेना को सुल्तान की सेना में शामिल कर लिया गया था।
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गुजरात के इस बादशाह का खुराक दुनियाभर में मशहूर था। ऐसा कहा जाता है कि वह नाश्ते में एक कटोरा शहद, एक कटोरा मक्खन और 100-150 केले खा जाते थे। सिर्फ यही नहीं, रात के समय भी उनके तकिए के दोनों तरफ खाना रख दिया जाता था, ताकि अगर उन्हें कभी भी भूख लगे तो तुरंत खा सकें।
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इतिहासकारों के मुताबिक, महमूद बेगड़ा को बचपन से ही किसी जहर का सेवन कराया गया था, जिसके बाद से वह हर रोज खाने के साथ थोड़ा-थोड़ा जहर भी लेते थे। इस बादशाह के शरीर में इतना जहर हो गया था कि अगर उनके हाथ पर कोई मक्खी भी बैठ जाती थी, तो वह भी पलभर में दम तोड़ देती थी।